कॉकरोच जनता पार्टी ने बीते दिन विजेता दहिया को पार्टी प्रवक्ता के पद से हटा दिया। छात्रों पर हुए लाठी चार्ज के दौरान विजेता दहिया एक आउटलेट में बर्गर खाते दिखे थे, जिस पर कुछ लोगों ने उनसे सवाल पूछे थे। साथ ही सोशल मीडिया पर भी उनकी खूब किरकिरी हुई थी। इस पर उन्होंने एक वीडियो बनाकर अपनी सफाई भी दी थी। इन सभी मुद्दों को लेकर विजेता दहिया ने जनसत्ता से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अपनी चुप्पी तोड़ी।

सवाल- जब प्रदर्शनकारी लाठीचार्ज और आंसू गैस का सामना कर रहे थे, उस वक्त आपका वहां से हटना क्या गलत संदेश नहीं देता?

उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि 20 जुलाई की रात मैं जगा रहा, पुलिस की गाड़ियां आ रही थीं। फिर सुबह भी मैं था, मार्च जब शुरू हुआ तो मैं पटेल चौक के ओर तक, वहां बंद था तो मैं दूसरी तरफ गया केरल हाउस की तरफ से, वहां आखों में काफी जलन हो रही थी। उस तरफ इंटरनेट बंद था मुझे नहीं पता था कि सीपी के आसपास भी प्रदर्शन हो रहा। तो मुझे लगा कि शाम को फिर आना है तो मैं जल्दी घर जाते हैं और फिर लौट के आते हैं, मुझे नींद भी बहुत आ रही थी और भूख भी काफी लगी थी। तो उसे फिर ऐसे दिखाया गया जैसे में कहीं से घूम के आ रहा हूं। तो मैं एक बर्गर आउटलेट के पास रूका। हालांकि मैंने बर्गर खाया भी नहीं। खाया भी नहीं क्योंकि मुझे लगा कि अनहेल्दी है, घर जाकर अच्छा खाएंगे। बर्गर वाला जो वीडियो है वो मैंने बाद में बनाया कि बर्गर खाना को लेकर आप नैतिकता पर सवाल नहीं कर सकते।

मेरा एक ही दिन में दो बार मनुवादी गुंडों से सामना हुआ। उन्होंने मेरे साथ धक्कामुक्की भी की। मुझे पहले दिन से इतने मुझे मारने की धमकी आ रहे हैं। एक बंदा अपना सारा काम छोड़कर 50 दिन से लगा हुआ है, दिन में सीजेपी के लिए बयान दे रहा। रात में पहरेदारी कर रहा। मैंने मार्च में हिस्सा लिया। अब आप मुझे बर्गर खाने के लिए जज कर रहे हैं ये तो सही नहीं है। मैंने पुलिस से थोड़ी कहा कि मुझे लाठी ने मारे। लेकिन आप प्रोपेगेंडा चला रहे हो कि विजेता को कोई मार भी देता तो आप कहते कि अभिजीत को नहीं लगी। मैं रात में लगा और प्रदर्शनकारियों से पूछा कि आपको इससे कोई समस्या है, उन्होंने कहा कि मुझे नहीं है।

सवाल- क्या आप उन लोगों से माफी मांगना चाहेंगी या कुछ कहना चाहेंगे, जो सिर्फ प्रदर्शन करने आए थे?

इसका जवाब देते हुए कहा कि इसमें दुख देने वाली क्या बात है। एक इंसान जो गिरने वाला है, जिसे भूख लगी है, जो सोया नहीं है, रातभर पहरे पर था, जिसे यह है कि यहां बैरिकेट लगे हुए हैं और शाम को मेरी जरूरत होगी तो शाम को मैं नहीं निकल पाऊंगा जो जल्दी से जाकर कुछ घंटे में वापस आ जाऊं तो शाम को प्रोटेस्ट देखा जाए तो उसमें क्या गलत क्या है और गलती क्या है मेरी? तो फिर जब उन लोगों ने कहा कि रिजाइन कर दो तो मैंने कहा रिजाइन किसलिए? मैंने आशुतोष और अभिजीत दीपके और जो कह रहे-कह रहे तुम मुझे देख रहे हो। तुम किसी के प्रोपगेंडा में क्यों आ रहे? तो बोले कि बहुत ज्यादा वायरल हो रहा है।

इसी मुद्दे पर आपने कहा कि, “बाकी लोग तो कह रहे थे, लेकिन दीपके ने भी कहा कि ‘तुझे हटाना पड़ेगा’।” उस वक्त आपके मन में क्या चल रहा था? क्या आपको लगा कि आपके साथ गलत हुआ?

‘अभिजीत दीपके भी खा रहे थे कचौड़ी’

इसके बाद मैंने अभिजीत से यह भी कहा कि वायरल तो यह भी हो गया कि अभिजीत कचौड़ी खा रहे, लेकिन मैंने तो मजबूती से आपका बचाव किया, सौरभ ने लेमनेड (नींबू पानी) पिया तो मैंने कहा कि यार इतनी गर्मी में अगर किसी ने लेमनेड पीया तो क्या गुनाह किया। तो इस तरह की बातें कि बर्गर खा लिया, कचौड़ी खा ली, लेमनेड पी लिया क्या है ये सब।

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