विजयवाड़ा पुलिस ने एक 38 साल की सिंगल मां को आतंकी मॉड्यूल की जांच में आरोपी बनाया है। जो घरेलू सहायिका के रूप में काम करती है और उसके इंस्टाग्राम पर 38,000 से ज्यादा फॉलोअर्स थे। जिसका कथित तौर पर नाम एक अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल में आरोपी के रूप में सामने आया है। पुलिस का दावा है कि उसने ऑनलाइन समूहों के माध्यम से लोगों को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने में भूमिका निभाई।
विजयवाड़ा पुलिस द्वारा आतंकी मॉड्यूल की जांच के तहत सईदा बेगम को 23 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। विजयवाड़ा द्वितीय टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, सईदा कथित तौर पर कट्टरपंछी उपदेशक इसरार अहमद और जाकिर नाइक का प्रचार करने वाले और आईएसआईएस और अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से संबंधित सामग्री और वीडियो प्रसारित करने वाले ऑनलाइन समूहों की सक्रिय सदस्य थीं। सईदा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है और उनके वकील का कहना है कि उन्होंने इन समूहों का गठन नहीं किया था, बल्कि उन्हें उनकी जानकारी के बिना इनमें शामिल किया गया था।
पुलिस का दावा है कि सईदा ने सदस्यों की भर्ती की। जिनमें बिहार का एक 16 वर्षीय निवासी भी शामिल था और उन्हें हथियार प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान में आतंकी शिविरों की यात्रा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
सईदा के अलावा, विजयवाड़ा पुलिस ने इस मामले में 11 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से अधिकतर की उम्र 20 से 29 वर्ष के बीच है। इनमें विजयवाड़ा का एक ड्राइवर, एक तकनीशियन और एक व्यवसायी, पटना का एक छात्र, अल हकीम शकूर नामक एक कथित विदेशी तस्कर, नई दिल्ली का एक चित्रकार और जोधपुर, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और नवी मुंबई के युवक शामिल हैं।
गिरफ्तार किए गए लोगों में आंध्र प्रदेश पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस सेल ने कहा कि यह महिला सबसे अलग थी। जांच में शामिल एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि सईदा ने अपने ऑनलाइन समूहों के सदस्यों को “जिहादी” वीडियो और साहित्य साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया और उसने विदेश में रहने वाले अपने संचालकों के नाम और संपर्क विवरण भी पोस्ट किए।
‘शांत स्वभाव की, हमेशा अपने फोन पर लगी रहती है’
सईदा अपने माता-पिता और छोटे बच्चे के साथ हैदराबाद के पुराने शहर के चंचलगुडा इलाके में एक छोटे से दो कमरों वाले किराए के मकान में रहती थी।
एक पड़ोसी ने बताया कि वह अपना और अपने माता-पिता का भरण-पोषण करने के लिए दो-तीन घरों में घरेलू सहायिका का काम करती थी। वह शांत स्वभाव की थी। किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती थी और अपने आप में ही रहती थी। उसकी मां ने एक बार कहा था कि वह हमेशा अपने फोन पर लगी रहती थी।
विजयवाड़ा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में दायर रिमांड रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वह चरमपंथी समूहों से जुड़ी हुई थी और उनकी विचारधारा से प्रभावित थी। उस पर सोशल मीडिया पर दर्जनों फर्जी प्रोफाइल बनाकर भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने और आम कामकाजी महिलाओं और गृहणियों को जिहाद पर चर्चा में शामिल होने के लिए उकसाने का आरोप है।
सईदा की बहन ने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से शोलापुर का रहने वाला था, लेकिन लगभग 20 साल पहले चंचलगुड़ा में बस गया था। सईदा चार बहनों में दूसरे नंबर की हैं। उनकी शादी एक चित्रकार से हुई थी। हालांकि, बेटे के जन्म के बाद वह कभी अपने पति के पास वापस नहीं लौटीं और चार साल पहले उनसे तलाक ले लिया। अपना और अपने बीमार माता-पिता का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने अपने इलाके में घरेलू सहायिका के रूप में काम करना शुरू कर दिया।
उसके रिश्तेदारों के अनुसार, सईदा ने चौथी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया था। बाद में उसे इंस्टाग्राम के बारे में पता चला और उसने रील बनाना शुरू कर दिया। जिससे उसके फॉलोअर्स की संख्या काफी बढ़ गई और प्रमोशन के जरिए उसने कुछ पैसे भी कमाए।
नाम न बताने की शर्त पर एक रिश्तेदार ने कहा कि उसने सबसे पहले अपने घर में खाना बनाने के वीडियो बनाना शुरू किया। बाद में वह इलाके के दर्ज़ियों या सिलाई करने वाली महिलाओं के पास जाती और उनके नाम और संपर्क विवरण के साथ उनके वीडियो बनाती। अगर उनके वीडियो के कारण उन्हें ऑर्डर मिलते, तो वह उनसे 500 से 1000 रुपये लेती थी। सईदा के 38,000 फॉलोअर्स थे।
हालांकि, रिश्तेदार ने बताया कि अपनी एक रील में यह खुलासा करने के बाद कि वह एक सिंगल मदर है। उसे पुरुषों से कई अपमानजनक संदेश और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। रिश्तेदार ने आगे कहा कि जहां तक मुझे पता है, उसने गलत व्यवहार करने वालों को ब्लॉक कर दिया था।
पुलिस के अनुसार, सईदा ने बताया कि 7-8 महीने पहले उन्हें इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर एक लिंक मिला था, जो एक धार्मिक समूह का था और आईएसआईएस को बढ़ावा देने वाले वीडियो पोस्ट करता था। उनके वकील अब्दस सलीम, जो विजयवाड़ा के केंद्रीय अपराध केंद्र में पांच दिनों तक चली पूछताछ के दौरान मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सईदा ने समूह बनाने के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे अन्य सभी आरोपों को भी नकार दिया है। उन्होंने दावा किया कि आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वाले समूहों में उन्हें स्वतः ही सदस्य और प्रशासक बना दिया गया था और इन गतिविधियों से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
छापे और गिरफ्तारियां
22 मार्च को एक सूचना के आधार पर कि कोई व्यक्ति जिहाद को बढ़ावा देने वाले वीडियो साझा/प्रकाशित कर रहा है। इसके बाद विजयवाड़ा द्वितीय टाउन पुलिस स्टेशन के कर्मियों ने विजयवाड़ा के विंचपेट इलाके में एक घर पर छापा मारा और एक टैक्सी चालक को हिरासत में लिया। पुलिस ने बताया कि उसने कथित तौर पर कबूल किया कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बन गया और जाकिर नाइक और इसरार अहमद जैसे उपदेशकों का अनुयायी बन गया। पुलिस ने यह भी बताया कि उन्होंने जिहादी साहित्य, चरमपंथी प्रचार सामग्री और प्रतिबंधित संगठनों के बैनर जब्त किए।
एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन कई ऐसे लोग मिले जो उनके विचारों और मतों से सहमत थे। जिनमें सईदा बेगम भी शामिल थीं, जिन्होंने कई समूह बनाए थे या पहले से ही उनकी सदस्य थीं।
पुलिस के अनुसार, कैब ड्राइवर ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने विजयवाड़ा के अन्य लोगों के साथ मिलकर एक छोटा उपसमूह बनाया था और सोशल मीडिया के माध्यम से दूसरों को कट्टरपंथी बनाने में शामिल था। आरोप है कि वे सोशल मीडिया के जरिए विदेशी सरगना अल-हाकिम शकूर के संपर्क में आए थे।
पुलिस के अनुसार, यह समूह युवाओं की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखता था और कथित तौर पर कमज़ोर युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालने या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करता था। उन पर कुछ युवाओं को हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेने के लिए पाकिस्तान और अफगानिस्तान जाने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग 6 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में थे। जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि वे इस गिरोह के और सदस्यों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
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