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लुकआउट नोटिस से हटा लिया गया था माल्या को हिरासत में लेने का निर्देश, बीजेपी सांसद का सवाल- किसके इशारे पर हुआ?

बता दें कि कई बैंकों ने भी अदालत में गुहार लगायी थी कि वह माल्या के फरार होने पर रोक लगाएं। लेकिन इस सबके बावजूद विजय माल्या जो कि उस वक्त राज्य सभा के सांसद भी थे, अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर भारत से आसानी से फरार हो गए।

vijay mallyaविजय माल्या ने कहा है कि भारत छोड़ने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। (express photo)

बुधवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाहर शराब कारोबारी विजय माल्या ने एक ऐसा बयान दिया, जिसके बाद भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है। दरअसल माल्या ने कहा है कि भारत छोड़ने से पहले उन्होंने वित्त मंत्री से मुलाकात की थी और उन्हें भारतीय बैंकों के साथ मामला सुलझाने का ऑफर भी दिया था। कांग्रेस ने विजय माल्या के इस बयान को हाथों हाथ लिया है और इसे मुद्दा बनाकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है। वहीं भाजपा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने भी बीती 12 जून को ही ट्वीट कर विजय माल्या के भारत छोड़कर जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब विजय माल्या के बयान के बाद एक बार फिर सुब्रमण्यन स्वामी का वह ट्वीट चर्चा में आ गया है।

सुब्रमण्यन स्वामी ने अपने उस ट्वीट में कहा था कि “माल्या भारत से नहीं भाग सकता था क्योंकि उसके खिलाफ सभी एयरपोर्ट्स पर लुक आउट नोटिस जारी था। इसके बाद वह दिल्ली आया और यहां किसी पॉवरफुल व्यक्ति से मुलाकात की। जिसके बाद माल्या के यहां से निकलने के लिए लुक आउट नोटिस में बदलाव किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि वह कौन व्यक्ति था, जिसने लुक आउट नोटिस में बदलाव किए?” बुधवार को जब माल्या ने बयान दिया तो किसी ट्वीटर यूजर ने सुब्रमण्यन स्वामी का वह ट्वीट फिर से रिट्वीट किया है। बता दें कि कई बैंकों ने भी अदालत में गुहार लगायी थी कि वह माल्या के फरार होने पर रोक लगाएं। लेकिन इस सबके बावजूद विजय माल्या जो कि उस वक्त राज्य सभा के सांसद भी थे, अपने डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर भारत से आसानी से फरार हो गए। 9000 करोड़ रुपए के लोन मामले में फंसे विजय माल्या ने 2 मार्च 2016 को भारत से फरार होकर लंदन में शरण ली थी।

द टेलीग्राफ की एक खबर के अनुसार, अक्टूबर, 2015 को सीबीआई ने विजय माल्या के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया था और ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन को कहा था कि यदि विजय माल्या देश छोड़कर जाने की कोशिश करे तो उसे तुरंत हिरासत में ले लिया जाए। लेकिन बाद में सीबीआई ने एक दूसरा सर्कुलर जारी किया और इमीग्रेशन अथॉरिटी को कहा कि वह माल्या को गिरफ्तार करने के बजाए उसकी गतिविधियों के बारे में सिर्फ उन्हें सूचित करे। 2 मार्च को विजय माल्या के फरार होने के बाद तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में सूचित किया। 11 मार्च, 2016 को इमीग्रेशन ब्यूरो ने दावा किया कि उन्होंने सीबीआई को अलर्ट किया था कि विजय माल्या 2 मार्च को इंटरनेशनल फ्लाइट लेने वाला है, लेकिन सीबीआई ने उन्हें बताया कि माल्या के खिलाफ कोई अरेस्ट वारंट नहीं है। इसके बाद सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि माल्या की गिरफ्तारी का नोटिस ‘गलती’ से जारी हो गया था। सीबीआई ने कहा कि “शराब कारोबारी को 3 बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था और हर बार माल्या ने पूरा सहयोग किया। ऐसे में इस मामले में चिंता करने वाली कोई बात नहीं थी।”

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