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विजय माल्‍या का आलीशान जेट 35 करोड़ रुपये में बिका, अब इनका हुआ

बताया जा रहा है कि विजय माल्या के इस प्राइवेट जेट की कीमत स्टैंडर्ड विशेषताओं के मुताबिक करीब 100 मिलियन डॉलर थी, लेकिन नीलामी के कारण यह जेट अमेरिकी फर्म को बेहद ही कम कीमत पर मिल गया है।

भगोड़े वित्तीय अपराधी विजय माल्या का आलीशान लग्जरी जेट आखिरकार नीलाम हो गया है। शुक्रवार को हुई नीलामी प्रक्रिया में यह जेट 34.8 करोड़ रुपए में बिक गया। बता दें कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद विजय माल्या के इस जेट को बेचने के लिए इससे पहले 3 बार नीलामी प्रक्रिया शुरु की गई थी, लेकिन अब चौथी बार में यह जेट बिक सका है। इस एयरबस जेट का रजिस्ट्रेशन नंबर भी वीआईपी A-319-133C VT-VJM MSN 2650 था। इसमें VJM का मतलब विजय माल्या है।

यूएस बेस्ड एक एविएशन फर्म एविएशन मैनेजमेंट सेल्स ने विजय माल्या का यह प्राइवेट जेट खरीदा है। जेट को खरीदने के लिए अमेरिकी फर्म ने 5.05 मिलियन डॉलर की बोली लगायी थी, जो कि पिछली बार सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा करायी गई ई-नीलामी में बोली लगायी गई रकम से काफी ज्यादा है। इस नीलामी की शुरुआत ही 1.9 मिलियन डॉलर से की गई थी। गौरतलब है कि यह नीलामी विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस पर बकाया सर्विस टैक्स की रिकवरी के तहत की गई थी। सूत्रों के अनुसार, विजय माल्या का यह प्राइवेट जेट बेहद शानदार है, जिसका इंटीरियर कस्माइज्ड और लग्जरी से भरपूर है।

बताया जा रहा है कि विजय माल्या के इस प्राइवेट जेट की कीमत स्टैंडर्ड विशेषताओं के मुताबिक करीब 100 मिलियन डॉलर थी, लेकिन नीलामी के कारण यह जेट अमेरिकी फर्म को बेहद ही कम कीमत पर मिल गया है। प्राइवेट जेट की इतनी कम कीमत मिलने का कारण उसकी ग्राउंडेड कंडीशन को बताया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस प्राइवेट जेट ने पिछले 5 सालों से कोई उड़ान नहीं भरी है, जिस कारण ही इस जेट को नीलामी के दौरान इतनी कम कीमत मिली है। इस जेट में 25 यात्री और 6 क्रू मेंबर एक साथ उड़ान भर सकते हैं। इस जेट में एक बेडरुम, बाथरुम, बार और कॉन्फ्रेंस रुम एरिया के साथ ही कई अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। सर्विस टैक्स विभाग ने इस जेट को मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़ा किया हुआ था, जिसके खिलाफ एयरपोर्ट अथॉरिटी बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गई थी।

दरअसल एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना था कि वह एयरपोर्ट पर जगह की कमी से जूझ रही है और इस जेट की वजह से उसे हर घंटे करीब 13 से 15 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस जेट को बेचने के लिए साल 2018 में मामला कर्नाटक हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया, क्योंकि किंगफिशर एयरलाइंस बेंगलुरु बेस्ड कंपनी थी।

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