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सीबीआई का दावा- विजय माल्या ने जान-बूझकर की थी लोन नहीं चुकाने की साजिश, ईमेल से हुआ खुलासा

विजय माल्या पर विभिन्न भारतीय बैंकों के करीब नौ हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। माल्या देश से फरार होकर लंदन जा चुके हैं।

Author Updated: June 30, 2017 9:40 AM
विजय माल्या (बीच में) और उनके बेटे सिद्धार्थ माल्या (दाएं)। (फाइल फोटो)

सदफ मोदक

सीबीआई के अनुसार बंद हो चुकी एयरलाइंस किंगफिशर के मालिक विजय माल्या का आईडीबीआई बैंक से लिया गया लोन चुकाने का कोई इरादा नहीं था। माल्या पर बैंक का 900 करोड़ रुपये बकाया है। सीबीआई ने पिछले हफ्ते माल्या द्वारा लोन न चुकाए जाने के मामले में पूरक आरोपपत्र (चार्जशीट) दायर किया था। सीबीआई ने मुंबई की अदालत में दायर आरोपपत्र में माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस के अधिकारियों और आईडीबीआई बैंक के अधकारियों को आरोपी बनाया है। सीबीआई ने आरोपपत्र में सबूत के तौर पर छह जनवरी 2012 को विजय माल्या द्वारा यूनाइटेड स्पीरीट्स लिमिटेड (यूएसएल) के वरिष्ठ अधिकारी पीए मुरली को भेजे ईमेल की प्रति संलग्न की है।

सीबीआई के अनुसार माल्या द्वारा भेजे गए ईमेल में कहा गया है, “आईडीबीआई से कई ईमेल आए हैं, केएफए अकाउंट के नॉन-पर्फार्मिंग एसेट (एनपीए) बन जाने के बारे में। वो अचानक ही कुछ कर सकते हैं। कल ही उन्होंने मेरे यूएसएल अकाउंट से 10 करोड़ रुपये काट लिए।” सीबीआई द्वारा इसी साल जनवरी में दायर की गई चार्जशीट में कहा गया था कि आईडीबीआई के अधिकारियों ने माल्या द्वारा लोन चुकाने के बाद किंगफिशर एयरलाइंस ब्रांड को “सिक्योरिटी” के तौर पर रखने को लेकर कोई कानूनी सलाह नहीं ली थी। सीबीआई के अनुसार ये विजय माल्या का आइडिया था कि किंगफिशर के “ब्रांड वैल्यू” को लोन के सिक्योरिटी के तौर पर लिया जाए। सीबीआई के अनुसार माल्या ने 10 सितंबर 2008 को यूबी ग्रुप के सीएफओ रवि नेदुगड़ी को लिखे मेल में ये आइडिया दिया था।

साल 2009 में माल्या ने भारतीय स्टेट बैंक को किंगफिशर की “ब्रांड वैल्यू” को सिक्योरिटी के तौर पर रखने का प्रस्ताव दिया था। किंगफिशर की “ब्रांड वैल्यू” 3365 करोड़ रुपये बताई गई। सीबीआई के अनुसार आईडीबीआई एवं अन्य बैंकों के अधिकारियों की यकीन दिलाया गया कि “ब्रांड वैल्यू” को सिक्योरिटी के तौर पर रखने का आइडिया बाहरी विशेषज्ञों द्वारा काफी गहन जांच के बाद सामने आया है। सीबीआई के अनुसार माल्या ने मिलीभगत करके जांच रिपोर्ट तैयार करवायी थी।

सीबीआई के अनुसार माल्या ने आईडीबीआई बैंक को दो स्वतंत्र विशेषज्ञों की “ब्रांड वैल्यू” रिपोर्ट देने की बात कही थी लेकिन आखिरकार उन्होंने केवल एक रिपोर्ट सौंपी जो उनके फायदे की थी। सीबीआई के अनुसार ग्रांट थॉर्नटन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में साफ लिखा है कि वो केवल “आंतरिक प्रयोग” के लिए है न कि “निवेश के लिए सुझाव” है। सीबीआई के अनुसार माल्या को पता था कि ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट में किंगफिशर की “ब्रांड वैल्यू” 1911 करोड़ रुपये आंकी गई है।

विजय माल्या पर विभिन्न भारतीय बैंकों के करीब नौ हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। बैंकों द्वारा साझा रूप से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद माल्या ब्रिटेन फरार हो गए थे। उस समय माल्या राज्य सभा सांसद थे और ब्रिटेन जाने से  एक दिन पहले भी वो संसद की कार्यवाही में शामिल हुए थे। बाद में भारतीय अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया। इस समय लंदन की अदालत में माल्या पर प्रत्यर्पण का केस चल रहा है। अगर भारत केस जीत जाता है तो माल्या को वापस लाया जा सकेगा। माल्या खुद के फरार होने या भगोड़ा होने के आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

वीडियो- सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या से 10 जुलाई तक हाजिर होने को कहा है

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