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NSG: आंख बंद कर भी दुश्‍मन को ढेर करने की ट्रेन‍िंग, ऐसे बनते हैं ब्‍लैक कैट कमांडो

एनएसजी में सीधी भर्ती नहीं होती बल्कि भारतीय सेना और अर्ध-सैनिक बलों के चुनिंदा जवानों को ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग दी जाती है।

NSG में बचे सिर्फ पुरुष कमांडो, मैटर्निटी लीव पर गईं आखिरी महिला कमांडो (PTI Photo)

भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा और आतंकवादी हमलों से बचाव का जिम्मा देश के नेशनल सिक्योरिटी गॉर्ड (एनएसजी) का होता है। ब्लैक कैट के नाम से मशहूर एनसीजी के कमांडो दुनिया के बेहतरीन कमांडों में शुमार होते हैं। अति-विशिष्ट लोगों की सुरक्षा के अलावा चाहे वो कश्मीर हो या पंजाब, विकट आतंकवादी हमलों से बचाव का जिम्मा भी एनएसजी पर ही होता है। साल 1984 में एनएसजी का गठन किया गया था। एनएसीजी कमांडो के काम की संवेदनशीलता के चलते उनके बारे में ज्यादा जानकारी मीडिया में नहीं आती। लेकिन राज्य सभा टीवी को सरकार ने हरियाणा के मानेसर स्थिति एनएसजी ट्रेनिंग कैम्प में रिपोर्ट की अनुमति दी। नीचे दी गयी चैनल की रिपोर्ट में आप इस सेंटर की झलकियाँ देख सकते हैं।

एनएसजी कमांडो हमेशा काले कपड़े और काले नकाब और काले ही बाकी साजो-सामान का इस्तेमाल करते हैं इसलिए उन्हें ब्लैक कैट कहा जाने लगा। एनएसजी का ध्येय वाक्य है- सबके लिए एक, एक के लिए सब। एनएसजी को आतंकवादी हमले की स्थिति में आतंकवादियों पर काबू पाना,  जमीन पर या हवा में आतंकवादियों द्वारा अगवा कर लिए गये लोगों को मुक्त कराना, आतंकवादी हमले से बचाव करना, बंधक बना लिए गये लोगों को छुड़ाना, बम की पहचान करना,  निष्क्रिय या बेकार करना और बम धमाके के बाद जाँच करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

एनएसजी में सीधी भर्ती नहीं होती है। भारतीय सेना और अर्ध-सैनिक बलों के सर्वश्रेष्ठ जवानों को एनएसजी की ट्रेनिंग के लिए चुना जाता है। उनमें भी सभी एनएसजी की ट्रेनिंग पूरी कर लें ये जरूरी नहीं है। एनएसजी कमांडो को “एक गोली से एक जान” लेने की ट्रेनिंग दी जाती है। यानी आपातकालीन स्थिति में सिर्फ एक गोली चलाकर किसी आतंकवादी को बेजान कर देना। एनएसजी  कमांडो को आँख बंद करके निशाना लगाने, अंधेरे में निशाना लगाने और बहुत ही कम रोशनी में निशाना लगाने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। बैटल असाल्ट ऑब्सक्टल कोर्स और सीटीसीसी काउंटर टेररिस्ट कंडिशनिंग कोर्स कमांडो को बैटल असाल्ट ऑब्सक्टल कोर्स और सीटीसीसी काउंटर टेररिस्ट कंडिशनिंग कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाता है जो दुनिया में अपनी तरह के विशिष्ट प्रशिक्षण हैं।

एनएसजी कमांडो को हथियार के साथ और हथियार के बिना दोनों तरह से मुकाबले की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्हें आग के बीच से गुजरते हुए मुकाबला करने और गोलियों की बौछार के बीच से गुजरकर अपना मिशन पूरा करने की ट्रेनिंग दी जाती है। एनएसजी ने अपने कमांडो की निशानेबाजी को और भी अचूक बनाने के लिए अब आईफैक्स ट्रेनिंग सिमुलेटर का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस इंट्रैक्टिव ट्रेनिंग सिमुलेटर के जरिए निशानेबाजी की ट्रेनिंग पूरी कर चुके कमांडों को क्षमता को और भी बेहतर बनाने के लिए कम्प्यूटर प्रोग्राम की मदद ली जाती है।

एनएसजी के सुरक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग है ड्राइवर। एनएसजी कमांडो में से कुशल ड्राइवर चुनने के लिए अलग से प्रक्रिया अपनायी जाती है। एनएसजी कमांडो के बीच सबसे अच्छे ड्राइवर चुनकर उन्हें खतरनाक रास्तों, बारूदी सुरंग वाले रास्तों, हमलवारों से घिर जाने की स्थिति में ड्राइविंग इत्यादि की ट्रेनिंग दी जाती है। एनएसजी ने अब महिला ब्लैक कैट कमांडों को भी ट्रेनिंग देने शुरू कर दी है। इसके अलावा एनएसजी के पास देश का इकलौता नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर है जिसमें आतंकवादियों द्वारा उपयोग किए गए बम धमाकों और अलग अलग आतंकी गुटों के तरीके पर रिसर्च किया जाता है।

राज्य सभा टीवी को एनएसजी के अधिकारी ने बताया कि एनएसजी की को सात मानकों पर ग्रेड दिए जाते हैं। एनएसजी की ट्रेनिंग लेने वाले करीब एक प्रतिशत जवान ही उसके सर्वश्रेष्ठ स्तर (फैंटम) पर पहुंच पाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार जब एनएसजी कमांडो फैंटम स्तर के लिए चुन लिया जाता है तो उसे मानेसर के ट्रेनिंग सेंटर से किसी अज्ञात स्थल पर आगे की ट्रेनिंग के लिए भेज दिया जाता है।

देखिए आरएस टीवी की विशेष रिपोर्ट-

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