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तीन दिन से पैदल चल रहा था युवक, जा रहा था 900KM दूर बिहार, खाना मिला तो फफक कर रो पड़ा, देखें वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की अपील के साथ ही लोगों से अपील की थी कि वे अपने घरों से न निकलें, हालांकि दिहाड़ी मजदूर रेल-बस सेवा न होने के बावजूद पैदल ही गृहनगर निकलने लगे।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 28, 2020 1:06 PM
प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बावजूद हजारों दिहाड़ी मजदूर पैदल अपने घरों की तरफ जा रहे हैं।

देश में कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए 14 अप्रैल तक लॉकडाउन का ऐलान किया गया। लोगों को घरों से बाहर न निकलने के लिए कहा गया है। हालांकि, हजारों की संख्या में कामगार दूसरे शहरों से अपने गृहनगर की तरफ जा रहे हैं। उनके लिए किसी तरह के साधन का इंतजाम नहीं किया गया। ऐसे में सभी पैदल ही लंबे सफर पर निकल गए हैं। कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोगों को सड़कों पर देखा जा सकता है। ऐसे ही एक वीडियो में बिहार जाने वाले एक युवक को दिखाया गया है, जो लगातार तीन दिन बिना खाने-पीने के चलता ही चला जा रहा था। इसी बीच रास्ते में जब उसे खाना मिला तो वह फफक कर रोने लगा।

यह वीडियो रचना सिंह नाम की एक महिला ने ट्विटर पर शेयर किया है। रचना ने प्रोफाइल में खुद को समाजवादी पार्टी से जुड़ा कार्यकर्ता बताया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि लाल टोपी पहने कुछ लोग घर जाते मजदूरों को रास्ते में रोककर खाना खिलाते हैं। इसी दौरान वे एक लड़के से बात करते हैं, जो खाना खाते हुए जोर-जोर से रोने लगता है। इस वीडियो में रचना ने लिखा, “आज एक व्यक्ति पैदल चलकर बिहार जा रहा था। 3 दिन बाद जब खाना मिला तो रो पड़ा।” उन्होंने इस वीडियो में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव को भी टैग किया है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार (24 मार्च) को ऐलान किया था कि देश में 21 दिन का लॉकडाउन लगाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि जो जहां है, वहीं रहें। कोरोनावायरस को रोकने के लिए सभी को घर के अंदर रहना होगा। हालांकि, पीएम के इस ऐलान के कुछ ही घंटों के अंदर हजारों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर और दूसरे शहरों में बसे कामगार अपने-अपने गृह राज्यों के लिए निकल गए। बस-ट्रेन की सुविधा न होने के बावजूद वे पैदल ही निकल पड़े। पैदल राहगीरों में ज्यादातर उत्तर प्रदेश-बिहार और पंजाब के हैं। हालांकि, अपने घरों तक पहुंचने के बावजूद कइयों को उनके गांव में घुसने नहीं दिया जा रहा, क्योंकि गांव वालों को डर है कि कोरोनावायरस संक्रमण कहीं उनके इलाकों में न पहुंच जाए।

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