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VIDEO: भाकपा नेता ने राम मंदिर को बताया ‘धंधा’, बीजेपी प्रवक्‍ता पैनलिस्‍टों से बोले- जयचंद हिंदुओं बैठकर सुन रहे हो

वहीं राम मंदिर को बीजेपी के लिए धंधा बताने वाले ज़ैदी ने विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी को लेकर कहा कि मंदिर विहिप के लिए आस्था है पर भाजपा के लिए नहीं।

संबित पात्रा ज़ैदी से मांफी की मांग पर अड़े रहे। (फोटो सोर्स : Indian Express)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक नेता ने राम मंदिर को बीजेपी के लिए धंधा बताया है। इसके बाद राम मंदिर को अपने एजेंडे में लेकर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी एक बयान पर आग बबूला हो गई है। एक निजी टीवी चैनल पर बहस के दौरान बीजेपी की तरफ से आए पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए मांफी की मांग पर अड़े रहे।

चार साल पहले ऐतिहासिक बहुमत हासिल कर केंद्र की सत्ता में पहुंचने के बाद से ही भाजपा पर राम मंदिर बनाने का दबाब रहा है। बीते कई माह से यह मांग तेजी से उठती रही है। अलग अलग हिंदू संगठनों से लेकर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत तक मोदी सरकार ने मंदिर बनाने की मांग उठा चुके हैं। बीते दिनों भागवत ने कहा था कि सरकार बिल लाकर राम मंदिर बनाए।

इसी मुद्दे पर टीवी चैनल पर बहस के लिए आए सीपीआई के प्रवक्ता आमिर हैदर ज़ैदी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर पर फैसला टलना बीजेपी के लिए शुभ संकेत है। मंदिर भाजपा के लिए आस्था नहीं है, बल्कि धंधा है।’ उनकी इस बात पर बहस तेज हो गई। भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कमान संभाल रहे संबित पात्रा का पारा चढ़ने में समय नहीं लगा। संबित ने ज़ैदी को माफी मांगने के लिए कहा और डिबेट की एंकर से उन्हें बाहर करने को कहा। संबित ने टीवी से ही राम मंदिर को धंधा कहने वाले बयान पर हिंदुओं से अपील करते हुए कहा, सुनिए 100 करोड़ हिंदुओंओ इन्हें माफ नहीं किया जाना चाहिए।

ज़ैदी के इस बयान पर टीएमसी के प्रवक्ता का समर्थन मिलने और अन्य लोगों के चु्प्पी साधे रहने पर पर संबित ने कहा, ‘जयचंद हिंदुओं, राम मंदिर को लेकर धंधे जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया और तुम लोग बैठ के सुन रहे हो।’ वहीं राम मंदिर को धंधा बताने वाले ज़ैदी ने विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी को लेकर कहा कि मंदिर विहिप के लिए आस्था है पर भाजपा के लिए नहीं। ज़ैदी ने यह भी कहा, जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानती सरकार तो मंदिर बनाने के लिए बिल क्यों लाई।

 

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