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वीडियोः ‘जो शेर दहाड़ता था, वह मिमियाने लगा’, बोले BJP प्रवक्ता; शिवसेना नेता ने कहा- ये शेर को बयां नहीं कर पा रहे

इसी बीच, गौरव भाटिया के बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा, "जो शेर दहाड़ता है, वह दहाड़ता ही अच्छा लगता है।

Author नई दिल्ली | Updated: November 13, 2019 10:52 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर बीजेपी और शिवसेना के बीच रार पर बुधवार को एक डिबेट में BJP प्रवक्ता गौरव भाटिया ने Shivsena पर चुटकी ली। उन्होंने कहा, “जो शेर कभी दहाड़ता था, वह अब मिमियाने लगा है। वह सर्कस का शेर बनकर अच्छा नहीं लगता है।”

शिवसेना नेता संजय गुप्ता ने इसी पर पार्टी का बचाव किया और जवाब दिया कि जो बीजेपी हमारे साथ 30 साल साथ रहकर दहाड़ी उसके लोग आज हमारी ही परिभाषा बयां नहीं कर पा रहे हैं।

दरअसल, ये वाकया ABP News से जुड़ा है। शाम को संविधान की शपथ कार्यक्रम में एंकर रोमाना ईसार खान महाराष्ट्र के मौजूदा हालात पर चर्चा करा रही थीं। डिबेट में उनके साथ बीजेपी और शिवसेना नेताओं के साथ कई और मेहमान भी मौजूद थे।

इसी बीच, गौरव भाटिया के बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा, “जो शेर दहाड़ता है, वह दहाड़ता ही अच्छा लगता है। अगर वह सर्कस का शेर बन जाएगा या मिमियाएगा तब अच्छा नहीं लगेगा। जहां विचारधारा या दिल हो, वहीं अच्छा लगेगा, क्योंकि जब एनसीपी को बुलाया गया तब कांग्रेस-एनसीपी चुनाव पूर्व गठबंधन में थे।” देखें, वीडियो कि डिबेट में आगे क्या हुआः

शिवसेना नेता ने इसी पर कहा- शेर…शेर ही रहता है। ये (बीजेपी) 30 साल हमारे साथ रहे और शेर की परिभाषा बता रहे हैं। ये हमारे साथ ही रहकर दहाड़े और हमारी ही परिभाषा नहीं बयां कर पा रहे हैं।

शिवसेना की नई शर्ते नामंजूर- शाहः गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के निर्णय पर विपक्ष द्वारा ‘‘कोरी राजनीति’’ करने का बुधवार को आरोप लगाया और कहा कि यदि किसी दल के पास संख्याबल है तब वह अब भी राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा कर सकता है। शाह ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘राज्यपाल महोदय ने अधिसूचना के बाद सभी पार्टियों को 18 दिन का समय दिया था। महाराष्ट्र में सभी पार्टियों को पूरा समय दिया गया। अब भी अगर किसी के पास संख्या है तो वे एकत्र होकर राज्यपाल के पास जा सकते हैं।’’

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगने से नुकसान भाजपा का हुआ है, विपक्ष का नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘हम शिवसेना के साथ सरकार बनाने को तैयार थे, लेकिन उनकी कुछ शर्तें ऐसी थीं जिन्हें हम मान नहीं सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति शासन पर जो हाय तौबा मची है, वह जनता की सहानुभूति प्राप्त करने का निरर्थक प्रयास है। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को लेकर विपक्ष की प्रतिक्रियाएं एक कोरी राजनीति हैं, इसके अलावा कुछ नहीं है। राज्यपाल महोदय ने किसी प्रकार से भी संविधान का उल्लंघन नहीं किया है।’’

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