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Video: जानें, 2050 के बाद भारत को विदेशों से क्‍यों मंगाना पड़ेगा पीने के लिए पानी

CGWB के मुताबिक, भारत में भूजल स्‍तर तेजी से गिर रहा है। 2050 तक हर आदमी के लिए भू-जल की उपलब्‍धता 3,120 लीटर/दिन पानी ही बचेगी।

अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (MIT) की रिपोर्ट के अनुसार बढ़ती आबादी भी जल संकट के पीछे अहम कारण।

अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (MIT) ने 2050 तक एशिया में गंभीर जल संकट की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में इसके तेजी से बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और जलसंरक्षण के उपायों के अभाव को अहम कारण बताया गया है। जहां तक भारत की बात है तो सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) के आंकड़े भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं। CGWB के मुताबिक, भारत में भूजल स्‍तर तेजी से गिर रहा है। 2050 तक हर आदमी के लिए भू-जल की उपलब्‍धता 3,120 लीटर/दिन पानी ही बचेगी। 2001 के आंकड़ों के मुताबिक, प्रति व्‍यक्ति भू-जल उपलब्‍धता 1951 के मुकाबले 35% तक गिरी है।

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1951 में एवरेज 14,180 लीटर प्रतिदिन प्रति व्‍यक्ति भू-जल की उपलब्‍धता थी, जो 2001 में घटकर 5,120 लीटर/प्रतिदिन ही रह गई। 2025 तक भू-जल की प्रति व्यक्ति उपलब्‍धता 1951 के मुकाबले 25% ही रह जाएगी और 2050 तक यह उपलब्धता सिर्फ 22 प्रतिशत ही बचेगी। सबसे ज्‍यादा गौर करने वाली बात यह भी है कि शहरी इलाकों पानी की 50% जरूरत ग्राउंड वाटर से ही पूरी होती है। इसी प्रकार से देश में 50 प्रतिशत सिंचाई भू-जल से ही की जाती है। 2013 के आंकड़ों के मुताबिक देश में बोतलबंद पानी का कारोबार 60 अरब रुपए का है। लेकिन 2018 तक यह 160 अरब रुपए हो जाएगा। यानी 22 प्रतिशत प्रति वर्ष की रफ्तार के साथ।

13 राज्‍यों में सूखा: महाराष्‍ट्र, आंध प्रदेश, गुजरात, राजस्‍थान, बिहार, यूपी समेत कुल 13 राज्‍यों के कई इलाके सूखे की चपेट में हैं।

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