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पद्मावती विवाद पर बोले उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू, कहा- शारीरिक धमकियां देना गलत, कानूनन हो प्रदर्शन

नायडू ने कहा कि "अहसमति को स्वीकार किया जा सकता है लेकिन विघटन स्वीकार्य नहीं है।"
Author नई दिल्ली | November 25, 2017 15:14 pm
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू। (पीटीआई फाइल फोटो)

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र में फिल्म निर्माताओं को शारीरिक धमकियां देना और अवरोध उत्पन्न करना अस्वीकार्य है। नायडू ने फिल्म ‘पद्मावती’ का विरोध करने वाले लोगों और समूहों से आग्रह किया कि वह शांतिपूर्ण और कानून के तहत विरोध करें। टाइम्स लिटफेस्ट के उद्घाटन सत्र के दौरान नायडू ने कहा, “फिल्म निर्माताओं को शारीरिक धमकियां और शारीरिक अवरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रदर्शनकारियों को कानून के तहत और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहिए।” नायडू ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वंतत्रता पर कोई सहमत है या नहीं इससे फर्क नहीं पड़ता। इस बहस को जारी रखने की इजाजत देनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “भारत हमेशा बहुलवादी परंपराओं व लोकाचार में विश्वास करता रहा है और कभी भी संकीर्ण, कट्टर विचारों के साथ बोझिल प्रथाओं को सिर उठाने की अनुमति नहीं देता।” नायडू ने यह भी कहा कि अहसमति को स्वीकार किया जा सकता है लेकिन विघटन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “यह अंतिम रेखा है और ताकत द्वारा भारत की अखंडता और एकता को कम करने के किसी भी प्रयास को शुरू में ही जड़ से उखाड फेंकना चाहिए इससे पहले की वो बाद में मुश्किलें खड़ी करें और अनियंत्रित हो जाए।”

आपको बता दें कि संजय लीला भंसाली की इतिहास पर आधारित फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर विवाद के बाद इसकी रिलीज को लेकर कई  राजपूत संगठन पूरे देश में विरोध कर रहे हैं। दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म पहले 1 दिसंबर को रिलीज होनी थी लेकिन इसे अभी अगले साल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राजपूत संगठन करणी सेना की मांग है कि फिल्म पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए। करणी सेना का आरोप है कि संजय लीला भंसाली ने फिल्म बनाने को लेकर इतिहास से छेड़छाड़ की है। हालांकि भंसाली पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने फिल्म बनाने के लिए तथ्यों से छेड़खानी नहीं की है।

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