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कुतुबमीनार पर रारः 27 हिंदू व जैन मंदिरों को तोड़कर बना स्मारक, VHP के दावे पर यूजर ने यूपी के बेरोजगारों को लेकर कसा तंज

कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है और इसका व्यास 14.32 मीटर है जो अधिकतम ऊंचाई पर 2.5 मीटर रह जाता है। इसे ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिया गया है।

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कुतुब मीनार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है(फोटो सोर्स: ANI/PTI)।

दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुब मीनार को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने दावा किया है कि यह 27 हिंदू व जैन मंदिरों को तोड़कर बनाया गया है। वीएचपी के प्रवक्ता विनोद बंसल ने दावा किया है, “कुतुब मीनार वास्तव में ‘विष्णु स्तम्भ’ था। कुतुब मीनार का निर्माण 27 हिंदू-जैन मंदिरों को तोड़कर उसकी सामग्री से किया गया था। इसे महज हिंदू समुदाय को चिढ़ाने के लिए बनाया गया।”

विनोद बंसल ने कहा, “हम मांग करते हैं कि इसके निर्माण को लेकर जिन मंदिरों को तोड़ा गया, उन सभी 27 मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया जाये और हिंदुओं को वहां पूजा करने की अनुमति दी जाए। नहीं तो विश्व हिंदू परिषद कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।”

बता दें कि कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है और इसका व्यास 14.32 मीटर है जो अधिकतम ऊंचाई पर 2.5 मीटर रह जाता है। इसे ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा दिया गया है। वहीं विश्व हिंदू परिषद की मांग पर सोशल मीडिया पर तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

एक ट्विटर यूजर(@WilfredQuadros1) ने यूपी के युवा बेरोजगारों को लेकर लिखा, “कृपया उत्तर प्रदेश के कुछ बेरोजगार युवाओं को इकट्ठा कर आंदोलन शुरू करें।” एक और ट्विटर यूजर(@JuniyaJuned) ने लिखा, “फिर एक नया विवाद खड़ा हो गया।’ गौरतलब है कि कुतुब मीनार के परिसर में स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम नामक मस्जिद है।

कुछ दिन पहले राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को एक पत्र लिखकर कुतुब परिसर में स्थित गणेश भगवान की दो मूर्तियों को हटाने की बात कही थी। द इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक एनएमए के अध्यक्ष तरुण विजय ने इस पत्र को भेजने की पुष्टि भी की थी।

एएसआई को भेजे गये पत्र में कहा गया कि कुतुब परिसर में ‘मूर्तियों को जिस तरह से रखा गया है वो ‘अपमानजनक’ है। उन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा जाना चाहिए। बता दें कि कुतुब परिसर में “उल्टा गणेश” मूर्ति कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद की दक्षिण-मुखी दीवार का हिस्सा है। वहीं लोहे के पिंजरे में बंद दूसरी मूर्ति जमीनी स्तर के करीब है और उसी मस्जिद का हिस्सा है।

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