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मोदी के पाक दौरे पर बरसी कांग्रेस-शिवसेना-विहिप, अमेरिका-चीन ने की तारीफ

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से लौटते वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक लाहौर पहुंचकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात करने की पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है..

Author नई दिल्ली | Updated: December 27, 2015 8:36 AM
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अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से लौटते वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अचानक लाहौर पहुंचकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात करने की पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है पर देश में कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के अलावा गठबंधन सहयोगी शिवसेना और हिंदुत्व की पैरोकार विहिप ने भी उनके इस कदम पर निशाना साधा है। आलोचनाओं से परेशान भाजपा शनिवार को पूरी तरह से नरेंद्र मोदी के समर्थन में उतर आई और लालकृष्ण आडवाणी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं ने प्रधानमंत्री की इस पहल की तारीफ की। भाजपा प्रवक्ता एमजे अकबर ने इस मुलाकात के बारे में कहा कि इसे जलवायु परिवर्तन के लिए असरदार उदाहरण कहा जा सकता है, बस अपवाद यह है कि यह उपमहाद्वीप को ठंडा नहीं बल्कि गर्म बनाना चाहती है।

कांग्रेस ने शनिवार को भी नरेंद्र मोदी पर हमले जारी रखे। यूपीए सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने वाला है। उन्होंने कहा कि हम भी संबंधों को सामान्य बनाना चाहते हैं पर मोदी जिस तरह से इस दिशा में बढ़ रहे हैं वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक महत्ता को कमजोर कर रहा है। प्रधानमंंत्री को यह बताने की जरूरत है कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्या बदला है। क्या उन्होंने (पाकिस्तान) दाऊद को आपको सौंपने का फैसला किया है… क्या उन्होंने 26/11 की सुनवाई तेज करने का निर्णय लिया है…। तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ निजी व्यापारिक हितों ने दौरे में भूमिका निभाई।

उन्होंने दावा किया कि दोनों प्रधानमंत्रियों के लिए ‘मध्यस्थ’ की भूमिका एक बड़े इस्पात कारोबारी ने निभाई। सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर ने भी दौरे के लिए मोदी पर निशाना साधते हुए पूछा कि दोनों देशों के बीच आखिर क्या बदल गया और इस दौरे से क्या हासिल हुआ है। खुर्शीद ने कहा कि एनडीए को अपना नाम बदलकर ‘कभी कुछ कभी कुछ’ रख लेना चाहिए। इससे पहले शुक्रवार को कांग्रेस ने तीखा हमले करते हुए कहा था कि मोदी की यह यात्रा भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के बजाय एक कारोबारी के निजी हितों को बढ़ावा देने के लिए थी। उन्होंने मोदी को इस कारोबारी का नाम सार्वजनिक करने की चुनौती भी दी थी।

उधर, शुक्रवार को मोदी की यात्रा का स्वागत करने के बाद पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी दल तहरीक ए इंसाफ के नेता इमरान खान ने भी सुर बदल लिए और इस कारोबारी का नाम लिए बिना कहा कि यह ‘हितों के टकराव’ का मामला है। खान ने सोशल माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर के जरिए एक भारतीय कारोबारी की कथित संलिप्तता पर परोक्ष हमला बोला। उन्होंने ट्वीट किया, ‘कारोबारी सहयोगियों के जरिए प्रधानमंत्रियों की बैठक दो देशों के बीच संबंध सुधारने की प्रक्रिया को कमतर करती है और हितों के टकराव पर सवाल खडेÞ करती है’।

खान ने कहा कि हम पाक-भारत संबंधों में गरमाहट का स्वागत करते हैं लेकिन एक कारोबारी सहयोगी द्वारा दोनों प्रधानमंत्रियों की बैठक कराने में अंतर्निहित स्वार्थ हैं। पाकिस्तान और भारत से संस्थागत ढांचे के जरिए बातचीत करने के लिए कहा। हालांकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने मोदी की यात्रा का स्वागत किया। पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने ट्वीट किया, ‘पाकिस्तान में आपका स्वागत है नरेंद्र मोदी। निरंतर संवाद ही सभी लंबित मुद्दों के समाधान का एकमात्र रास्ता है’। अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) नेता जाहिद खान ने कहा कि मोदी की यात्रा ‘पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्तों की नई शुरुआत’ है। उधर, प्रतिबंधित संगठन जमात उद दावा प्रमुख हाफिज सईद ने कहा कि मोदी के अभूतपूर्व स्वागत से पाकिस्तान के देशभक्त लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा है। उसने कहा कि मोदी और नवाज के बीच ‘निजी’ बातचीत से कश्मीरियों को किस प्रकार का संदेश दिया गया।

उधर, अमेरिका और चीन जैसे देशों ने मोदी की इस पहल का स्वागत किया है। अमेरिका ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर रिश्तों से पूरे क्षेत्र के लोगों को लाभ होगा। चीन ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि भारत व पाकिस्तान के संबंधों में सुधार क्षेत्रीय शांति, स्थायित्व व विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कंग ने कहा कि पाकिस्तान और भारत दक्षिण एशिया में महत्त्वपूर्ण देश हैं और उनके संबंधों में सुधार क्षेत्रीय शांति, स्थायित्व व विकास के लिए अहम होगा।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के हुई इस मुलाकात को ‘नवाचारी कूटनीति’ करार देते हुए इसे पाकिस्तान भारत के संबंध के बारे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कल्पना के अनुकूल बताया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने नवाचारी कूटनीति (इनोवेटिव डिप्लोमेसी) की शुरुआत की है… काल्पनिक क्षमता का धनी व्यक्ति ही इस तरह का कदम उठा सकता है। भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि मोदी और सरकार के अन्य नेताओं को भारत-पाकिस्तान संबंध सुधारने की दिशा में अटल बिहारी वाजपेयी की पहल को आगे बढ़ाना चाहिए और आतंकवाद की परेशानी से छुटकारा पाना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान के औचक दौरे को उपमहाद्वीप के लिए ‘परिवर्तनकारी क्षण’ बताते हुए भाजपा भाजपा प्रवक्ता एमजे अकबर ने कहा कि इसने मुश्किल भारत-पाक संबंधों में नया अध्याय लिखने का एक और मौका दिया है। उन्होंने कांग्रेस की आलोचनाओं को ‘बचकाना’ बताते हुए इन्हें खारिज किया। पार्टी ने मोदी के ‘साहस, नजरिए, कौशल और कल्पनाशीलता’ के लिए उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के इतिहास के साथ जटिल क्षेत्र में शांति खोजने के लिए इस तरह के साहस की जरूरत है।

भाजपा प्रवक्ता एमजे अकबर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति प्रक्रिया एक ‘‘असाधारण’’ तरीके से पुनर्जीवित हुई है। पार्टी उपमहाद्वीप में परिवर्तनकारी क्षण पैदा करने के लिए प्रधानमंत्री के साहस, नजरिए, कल्पनाशीलता और कौशल के लिए उनकी गहरी प्रशंसा करती है। अकबर ने कहा कि शांति की खोज का मतलब यह नहीं कि हमें यह मिल गई है। लेकिन हमारी जैसी जटिल समस्याओं, इतिहास, शांति के लक्ष्य, हमेशा नाजुक स्थिति वाले क्षेत्र में प्रक्रिया के लिए लाहौर जैसे साहस की जरूरत होती है। हम शांति की खोज में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के नजरिए और नेतृत्व के लिए उन्हें बधाई देते हैं।

कांग्रेस के आरोप कि एक उद्योगपति ने लाहौर में बैठक की व्यवस्था की और मोदी का दौरा निजी कारोबारी हितों को बढ़ावा देने के लिए हुआ, पर अकबर ने कहा कि इस बचपने का क्या जवाब हो सकता है… ये न केवल पूरी तरह से गलत है बल्कि इस तरह के सवाल उठाने वाले के दिमाग को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, एक या दो दल हैं जो राष्ट्र हित पर दलगत राजनीति को तरजीह दे रहे हैं। आशा है कि वे समझेंगे कि प्रधानमंत्री का नजरिया सबकी भलाई के लिए है। उन्होंने कहा कि बाहरी दुनिया के अलावा पाकिस्तान के मुख्यधारा के राजनीतिक दल और भारत में वामदलों ने भी इसका स्वागत किया है।

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