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विहिप चुनाव: प्रवीण तोगड़िया युग का अंत? जानें- कौन हैं नए अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष जस्टिस सदाशिव कोकजे

जस्टिस कोकजे का पूरा नाम विष्णु सदाशिव कोकजे है। वो वाजपेयी सरकार के दौरान 8 मई 2003 से लेकर 19 जुलाई 2008 तक हिमाचल प्रदेश के गवर्नर रह चुके हैं।

विश्व हिन्दू परिषद के चुने गए नए अध्यक्ष जस्टिस वी सदाशिव कोकजे (बाएं) और निवर्तमान अध्यक्ष राघव रेड्डी (दाएं)।

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने जस्टिस वी सदाशिव कोकजे को अपना नया अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। विहिप के इतिहास में पहली बार आज (14 अप्रैल को) हुए चुनाव में जस्टिस कोकजे को मौजूदा अध्यक्ष राघव रेड्डी की जगह चुना गया है। नई दिल्ली से सटे गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में विहिप के 273 में से 192 प्रतिनिधियों ने वोट डाले। विहिप की स्थापना 1964 में हुई थी। माना जा रहा है कि इस चुनाव में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया का कद घटाने के लिए यह चुनाव कराए गए हैं। तोगड़िया के रिश्ते पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी और संघ से अच्छे नहीं चल रहे हैं। शायद इसीलिए चुनाव से ऐन पहले जस्टिस कोकजे को मैदान में उतारा गया। मौजूदा अध्यक्ष राघव रेड्डी तोगड़िया के करीबी समझे जाते हैं। इसलिए तीसरी बार उनकी ताजपोशी नहीं हो सकी।

जस्टिस कोकजे का पूरा नाम विष्णु सदाशिव कोकजे है। वो वाजपेयी सरकार के दौरान 8 मई 2003 से लेकर 19 जुलाई 2008 तक हिमाचल प्रदेश के गवर्नर रह चुके हैं। जस्टिस कोकजे उससे पहले जुलाई 1990 से अप्रैल 1994 तक मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट के जज और अप्रैल 1994 से सि‍तंबर 2001 तक राजस्‍थान हाई कोर्ट में भी जज रह चुके हैं। वो मूलत: मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले हैं। जस्टिस कोकजे भारत विकास परिषद के बी अध्यक्ष रह चुके हैं।

79 साल के जस्‍ट‍िस वी सदाशिव कोकजे का जन्म 6 सितंबर, 1939 को मध्य प्रदेश के धार जि‍ले में दाही तहसील के कुकसी गांव में हुआ था। उन्होंने इंदौर के होल्कर कॉलेज से बीए किया। इसके बाद क्रिश्चन कॉलेज से समाज शास्त्र में एमए की डिग्री ली। इंदौर से ही उन्होंने लॉ किया। इसके बाद 1964 से वकालत करने लगे।

नरेंद्र मोदी के साथ मौजूद प्रवीण तोगड़िया( फाइल फोटो-financialexpress.com )

ऐसा कहा जा रहा है कि कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया से बीजेपी और आरएसएस का शीर्ष नेतृत्व नाराज चल रहा है। पिछले साल 29 दिसंबर को भुवनेश्वर में विहिप की बैठक में अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर चुनाव के लिए सहमति की कोशिश की गई थी लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल सकी थी। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और आरएसएस नहीं चाहती थी कि प्रवीण तोगड़िया वीएचपी में हावी रहें क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो साल 2019 में मोदी की राह मुश्किल हो सकती थी।

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