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VHP के डिजाइन के हिसाब से मंदिर बना तो लगेंगे कम से कम 5 साल? कई हैं चुनौतियां

एचपी की कार्यशाला 1990 से लगातार चल रही है। जिसमें कारिगर रोजाना 8 घंटे काम करते हैं। लेकिन, बीते तीन दशकों में अभी तक ग्राउंड फ्लोर का आधा स्ट्रक्चर ही तैयार हो पाया है।

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में यदि बहुत तेजी से काम शुरू हुआ तो भी कम से कम पांच साल लग जाएंगे। (इस तस्वीर का इस्तेमाल सांकेतिक रूप से किया गया है। फोटो सोर्स- रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है। लेकिन, अगर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के डिजाइन के हिसाब से मंदिर बनाने का काम चलता है, तो इसे पूरा करने में 250 से अधिक कुशल कारीगरों को दिन-रात काम करते हुए 5 साल का समय लग जाएगा। यह बात टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में मंदिर वर्कशॉप के सुपरवाइजर के हवाले से कही है।

गौर करने वाली बात यह है कि बीएचपी की कार्यशाला 1990 से लगातार चल रही है। जिसमें कारिगर रोजाना 8 घंटे काम करते हैं। लेकिन, बीते तीन दशकों में अभी तक ग्राउंड फ्लोर का आधा स्ट्रक्चर ही तैयार हो पाया है। इसके अलावा कार्यशाला में आखिरी एक्सपर्ट रजनीकांत सोमपुरा के देहांत के बाद फिलहाल कोई कारिगर नहीं है।

मंदिर निर्माण में 212 पिलर लगाने की तैयारी हैं। कार्यशाला की देखरेख करने वाले अनुभाई सोमपुरा ने TOI को बताया है कि फलिहाल साइट पर कोई वर्कर नहीं है। यदि काम फिर से शुरू किया जाता है तो कम से कम 250 कुशल कारिगरों की जरूरत होगी और इसे पूरा करने में 5 साल लग जाएंगे। 80 साल के अनुभाई ने बताया कि मंदिर के निर्माण में चूना-पत्थर और समेंट का इस्तेमाल होगा और ढांचे के ऊपर सफेद सीमेंट लगाया जाएगा। मंदिर के सिर्फ का सिर्फ ढांचा करने भर से ही काम पूरा नहीं होगा। इसके अलावा भी कई काम करने होंगे।

फिलहाल राम मंदिर के लिए आधे पिलर तैयार कर लिए गए हैं। गर्भगृह की दीवार भी तैयार है। हालांकि, अभी 50 फीसदी काम अधूरा है। अभी भी तकरीबन 106 पिलर, शिखर और छत को बनाना बाकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अनुभाई फिलहाल गुजरात में हैं और वह जल्द ही अयोध्या लौटेंगे।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण में काफी पैसे की जरूरत होने वाली है। अभी तक चंदे को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के लिए अगले 3 महीनों के भीतर ट्रस्ट बनाने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में विश्व हिंदू परिषद के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मंदिर निर्माण में सरकार से कोई सहयोग नहीं लिया जाएगा। इसका काम हिंदू समाज से चंदा लेकर पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि पहले से भी वीएचपी के पास चंदे के रूप में एक बड़ा हिस्सा मिला है, लेकिन उसने चंदे की रकम के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है।

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