जब धर्मांतरण का आरोप लगाकर विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चर्च में गाए भजन, जानें पूरा मामला

घटना का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि दर्जनों पुरुष और महिलाएं हुबली के बेरिदेवारकोप्‍पा चर्च के अंदर बैठे हुए हैं और भजन गा रहे हैं।

Bajrang Dal
अस्थाई चर्च में बजरंग दल और विश्‍व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने रविवार सुबह जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया और विरोध जताते हुए राम भजन गाए। (फोटो/सोशल मीडिया)

कर्नाटक के हुबली से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां के एक अस्थाई चर्च में बजरंग दल और विश्‍व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने रविवार सुबह जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया और विरोध जताते हुए राम भजन गाए।

इस घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि दर्जनों पुरुष और महिलाएं हुबली के बेरिदेवारकोप्‍पा चर्च के अंदर बैठे हुए हैं और भजन गा रहे हैं।

वहीं चर्च के सदस्य और विरोध जता रहे लोगों ने एक दूसरे पर हमला करने का आरोप लगाया है। पादरी सोमू और उनके कुछ सहयोगियों को मामूली चोटें भी आई हैं।

चर्च के अधिकारियों ने कहा कि उन्‍होंने इस मामले में सोमवार को शिकायत दर्ज कराई है। हुबली-धड़वाड़ के पुलिस कमिश्‍नर एल. राम ने इस घटना की पुष्टि की है और कहा है कि मामले की जांच की जा रही है। सोमू अवराधी को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं इस मामले में बजरंग दल के राज्‍य संयोजक रघु सकलेशपोरा का कहना है कि विश्‍वनाथ नाम का शख्‍स वहां धर्मांतरण के लिए ले जाया गया था, वह चर्च से पुलिस स्‍टेशन गया था और उसने पादरी समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी, इसके बाद हमारे कार्यकर्ता चर्च के अंदर गए और विरोध जताने के लिए हिंदू भजन गाए।

वहीं बजरंग दल के कार्यकर्ता शशि का कहना है कि हमने कुछ गलत नहीं किया। पादरी व अन्‍य के खिलाफ जिस शख्स ने धर्मांतरण की शिकायत की थी, उसे पादरी सोमू ने गालियां दी थीं। हालांकि चर्च का कहना है कि धर्मांतरण की कोई कोशिश नहीं हुई।

बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि कर्नाटक में पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यक कल्याण की संवैधानिक समिति ने राज्य के मिशनरी चर्चों का सर्वे कराने का आदेश दिया है। बताया गया कि इसका उद्देश गैरकानून रूप से चल रहे चर्च और जबरन धर्मांतरण को रोकना है। सरकार के कई विभाग और जिलों के कमिश्नर यह सर्व करवाएंगे।

13 अक्टूबर को भाजपा विधायक शेखर की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला किया गया है। विधायक ने बताया कि राज्य में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए यह कदम जरूरी है।

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