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7th Pay Commission: NFU पर मोदी सरकार के स्‍टैंड से पूर्व सैनिक नाराज, अभी नहीं मिलता फायदा

पूर्व सैनिक एनएफयू के लेकर मोदी सरकार के रुख से काफी नाराज है। पूर्व सैनिक आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के एनएफयू संबंधी फैसले को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

सरकार की तरफ से ट्रिब्यूनल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। (फोटोः इंडियन एक्सप्रेस)

7th Pay Commission: पूर्व सैनिक नॉन फंक्शनल अपग्रेड (एनएफयू) को लेकर मोदी सरकार के रुख से नाराज हैं। सैनिकों को शिकायत है कि आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) की तरफ से सेना के पक्ष में फैसला आने के बाद भी अभी तक उन लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। दरअसल सरकार ने ट्रिब्यूनल की तरफ से दिए गए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रखी है। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि एनएफयू का लाभ सैन्य कर्मियों को नहीं मिलना चाहिए क्योंकि सेना के अधिकारियों के पास पहले से ही आलीशान घर है। सरकार के इस रुख को लेकर सेना के वर्तमान के साथ अधिकारियों के साथ ही पूर्व सैन्य अधिकारियो में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। हालांकि रक्षा मंत्रालय की तरफ से आलीशान घर का जिक्र सरकार की तरफ से लिखित में नहीं किया गया है।

सूत्रों का कहना है सरकार की तरफ से इस बात का जिक्र मौखिक रूप से सुनवाई के दौरान किया गया। सरकार की तरफ से एनएफयू नहीं दिए जाने से सैन्य बलों को कुछ विशेष भत्तों के साथ कई अन्य सुविधाओं से वंचित होना पड़ेगा।

सूत्रों का कहना है कि सरकार का यह भी मानना है कि सैन्य बलों का कार्यात्मक ढांचा अलग है जो एनएफयू को लागू करने से टूट जाएगा। इस मुद्दे को लेकर अनेक पूर्व अधिकारियों ट्विटर पर पिछले कुछ दिनों में अपने बंकरों और अपने रहने की जगहों की तस्वीरें पोस्ट की हैं। इसमें सरकार के रुख का मजाक उड़ाते हुए ‘आलीशान घर’ बताया गया है।

पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने ट्विटर पर लिखा, ‘कौन सरकार चला रहा जिसने रक्षा मंत्रालय को सैन्य बलों को एनएफयू देने से इनकार किया है। साथ ही एएफटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।’

मालूम हो कि एनएफयू के तहत ग्रुप ए सेवाओं के सिविल सर्विस अधिकारियों की तरह डिफेंस अधिकारियों को प्रमोशन न पाने के बाद भी उस बैच के सबसे अधिक प्रोमोशन पाने वाले अधिकारी के बराबर सैलरी मिलती है। इसका उद्देश्य यह है कि प्रोमोशन नहीं पाने वाले अधिकारियों में भी उत्साह बना रहें क्योंकि उच्च स्तर पर पदों की संख्या कम हो जाती है।

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