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मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का मिला दर्जा, लोकसभा में बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके अनुभवी कांग्रेस नेता मनमोहन सरकार में मंत्री भी रहे

पिछले और वर्तमान लोकसभा में कांग्रेस को विपक्ष का नेता का पद नहीं मिल सका था। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के पास इस पद को पाने के लिए जरूरी संख्या में सांसद नहीं हैं।

Leader of oppositionराज्यसभा में विपक्ष के नए नेता बने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे। (फोटो- पीटीआई)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता होंगे। गुलाम नबी आजाद के राज्यसभा से रिटायर होने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी दी गई है। वह कांग्रेस पार्टी के अनुभवी और पुराने नेताओं में हैं। वह लोकसभा में पार्टी की ओर से बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इससे पहले वह मनमोहन सिंह सरकार में वह मंत्री भी रह चुके हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे मूलरूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनकी पहचान जुझारू दलित नेता के रूप में हैं। 2014 से 2019 तक वह लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे हैं। हालांकि 2019 में वह लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाए। इस पर पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेज दिया। वह पार्टी में 1969 में शामिल हुए थे।

पिछले और वर्तमान लोकसभा में कांग्रेस को विपक्ष का नेता का पद नहीं मिल सका था। लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के पास इस पद को पाने के लिए जरूरी संख्या में सांसद नहीं हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा पाने के लिए उसकी पार्टी के पास कम से कम 10 फीसदी सीटें होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने की वजह से ही कांग्रेस पार्टी को यह दर्जा नहीं मिल सका है।

हालांकि राज्यसभा में पार्टी के पास जरूरी नंबर है। कांग्रेस पार्टी की ओर से गुलाम नबी आजाद के बाद कई विकल्प थे। मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा, आनंद शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आदि भी दावेदार रहे हैं।

राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को राज्यसभा में बतौर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पर अपनी स्वीकृति दे दी। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर खड़गे को उच्च सदन में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का अनुरोध किया था।

वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सदन में अपने तार्किक अंदाज और जरूरी मुद्दों पर अपनी बात प्रमुखता से रखे जाने के लिए जाने जाते है। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव का पार्टी को फायदा मिलता रहा है।

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