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Venkaiah Naidu Farewell: पहले प्‍यार का जिक्र कर फंसे राघव चड्ढा, वेंकैया नायडू ने पूछा ऐसा सवाल कि बोलना पड़ा- मैं अनुभवी नहीं हूं सर

देश के 13वें उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के विदाई संदेश में आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि हर व्यक्ति का पहला अनुभव होता है। पहला स्कूल, पहली टीचर, पहला प्यार। इसी तरह अपने संसदीय जीवन की शुरुआत की याद में आपको पहले चेयरमैन के तौर पर याद रखूंगा।

Venkaiah Naidu Farewell: पहले प्‍यार का जिक्र कर फंसे राघव चड्ढा, वेंकैया नायडू ने पूछा ऐसा सवाल कि बोलना पड़ा- मैं अनुभवी नहीं हूं सर
आप सांसद राघव चड्ढा (PTI Photo/Shahbaz Khan)

देश के 13वें उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू को सोमवार (8 अगस्त, 2022) को राज्यसभा में विदाई दी गई। इस दौरान, सभापति की विदाई के कारण माहौल थोड़ा गमगीन रहा, लेकिन जब आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने पहले प्यार का जिक्र किया तो वेंकैया नायडू ने भी इस पर चुटकी ली और सदन में बैठे सभी लोग जोर से हंसने लगे।

वेंकैया के विदाई संदेश में राघव चड्ढा ने कहा कि हर व्यक्ति का अपना पहला अनुभव याद होता है, स्कूल का पहला दिन, पहला प्रिंसीपल, पहली टीचर, पहला प्यार। इस सदन में जब मैं आया तो मैंने अपने संसदीय जीवन की शुरुआत की, तब पहले चेयरमैन के रूप में मैं आपको याद रखूंगा।

उन्होंने कहा, “सर आपने उन सारे शब्दों को सार्थक किया है। मैं आपको आपका सफल कार्यकाल समाप्त करने पर बहुत बधाई देता हूं।”

राघव चड्ढा के भाषण पर वेंकैया नायडू ने उन्हें छेड़ते हुए कहा कि मेरे ख्याल से प्यार एक ही होता है ना? एक बार, दूसरी बार, तीसरी बार ऐसा तो नहीं है ना। पहला प्यार अच्छा होता है, वही प्यार हमेशा रहता है, जिंदगीभर।” इस पर आप सांसद ने कहा कि मुझे इतना अनुभव नहीं हुआ, लेकिन अच्छा होता है।

वेंकैया नायडू का कार्यकाल

नायडू के कार्यकाल में राज्यसभा के करीब 78 फीसद सदस्य सदन में उपस्थित रहते थे, हर दिन दैनिक उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करते थे, ऐसे सिर्फ तीन फीसद सांसद ही थी, जिन्होंने ऐसा नहीं किया। वहीं, नायडू हमेशा सदन को हंगामे के बावजूद सुचारू रूप से चलाने का प्रयास करते थे। कई बार ऐसा भी देखा गया, जब असंवैधानिक भाषा का इस्तेमाल करने या नियमों का पालन ना करने पर कई सांसदों को निलंबित किया गया।

नायडू के कार्यकाल में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019, एसपीजी (संशोधन) अधिनियम जैसे प्रमुख बिल भी पास हुए जिनको लेकर देशभर में कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

इसके अलावा, 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के लिए मंजूरी देने में सदन की अहम भूमिका रही थी। इसके बाद जम्मू और कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने वाला विधायक पारित किया गया था। इस दौरान विपक्ष ने काफी विरोध किया, लेकिन उन्होंने सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाए रखा।

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