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भारत रत्न पर मनमोहन सिंह बनाम नरसिम्हा राव, कांग्रेसियों ने दोनों के लिए मांगे सर्वोच्च सम्मान, तेलंगाना असेंबली में PVR के लिए प्रस्ताव पास

पूर्व केंद्रीय मंत्री मोइली ने कहा कि राव निश्चित तौर पर सम्मान के हकदार हैं लेकिन आर्थिक मोर्चे पर मनमोहन सिंह का योगदान भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जब नरसिम्हा ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो देश की अर्थव्यवस्था संकट में थी और देश की हालत खराब थी।

Narsimha Rao, Manmohan Singh Bharat Ratna, Veerappa Moiliमोइली ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का श्रेय नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह दोनों को जाता है। (फाइल फोटो)

वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली ने देश के 2 पूर्व प्रधानमंत्रियों पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह के लिए भारत रत्न की मांग की है। उन्होंने इन दोनों ही नेताओं को इस सम्मान का हक़दार इसलिए बताया है क्योंकि उन्होंने देश के आर्थिक हालातों में व्यापक सुधार किये थे।

हालांकि मंगलवार को तेलंगाना विधानसभा में भी एक प्रस्ताव पास कर के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के लिए मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग की गई थी। हालांकि, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। आपको बता दें कि साल 2020 नरसिम्हा राव की जनशताब्दी भी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री मोइली ने कहा कि राव निश्चित तौर पर सम्मान के हकदार हैं लेकिन आर्थिक मोर्चे पर मनमोहन सिंह का योगदान भी समान रूप से महत्त्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “जब नरसिम्हा ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तो देश की अर्थव्यवस्था संकट में थी और देश की हालत खराब थी।” मोइली ने आगे कहा कि राव, मनमोहन सिंह के साथ मिलकर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाए। यह श्रेय नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह दोनों को जाता है। यह अधिक उचित होगा कि दोनों को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।

मोइली ने याद किया कि सिंह ने राव मंत्रिमंडल में वित्त मंत्री के तौर पर सेवा दी थी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सिंह को न सिर्फ देश में बल्कि दुनिया के “सबसे प्रख्यात” अर्थशास्त्रियों में माना जाता है। वर्ष 1991 में वित्त मंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण का एक नया मॉडल पेश किया था।

इसमें विदेश व्यापार उदारीकरण, वित्तीय उदारीकरण, विदेशी निवेश कर सुधर, लाइसेंस राज का खात्मा आदि प्रमुख थे। इसी के बदौलत जहां आजादी के बाद से 1991 तक भारत की विकास दर औसतन 4.34 फीसद रही वहीं 1991 से 2011 तक में यही दर औसतन 6.24 फीसद हो गई। इसके साथ ही 2015 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकर 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।

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