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जयपुर वाया दिल्ली यात्रा के बाद सवालों में वसुंधरा का राजमार्ग

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के भविष्य को लेकर प्रश्न चिह्न लगा हुआ है। इसकी वजह उनका भाजपा अध्यक्ष व दूसरे पार्टी नेताओं से मिले बिना जयपुर लौट जाना है..

वसुंधरा राजे भाजपा आलाकमान से मिले बिना राजस्थान लौटी गईं। (पीटीआई फो़टो)

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के भविष्य को लेकर प्रश्न चिह्न लगा हुआ है। इसकी वजह उनका भाजपा अध्यक्ष व दूसरे पार्टी नेताओं से मिले बिना जयपुर लौट जाना है। वसुंधरा खेमा दावा कर रहा है कि हाईकमान ने उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं पाया है। वहीं दूसरे लोगों का दावा है कि वरिष्ठ नेताओं का उन्हें मिलने का समय न देना अपनी नाराजगी जाहिर करने का तरीका है।

आइपीएल के दागी पूर्व आयुक्त ललित मोदी को लेकर उठे विवाद में घिरीं राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले बिना ही जयपुर लौट गर्इं। उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मिलने के लिए समय मांगा था। विपक्ष की ओर से इस्तीफे की मांग का सामना कर रहीं राजे सुबह करीब साढ़े नौ बजे दिल्ली पहुंची थीं और लगभग चार घंटे बाद शहर से वापस चली गर्इं।

पार्टी सूत्र इस बारे में चुप्पी साधे हुए हैं कि क्या राजस्थान की मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री या पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात के लिए कोई समय मांगा था। शुक्रवार रात प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष शाह के बीच बैठक के बाद सूत्रों ने संकेत दिया था कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने विवाद को लेकर राजे का पक्ष स्वीकार कर लिया है। शुक्रवार को भाजपा की राजस्थान इकाई ने उन पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि मोदी के आव्रजन आवेदन के समर्थन में वसुंधरा के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज कभी अदालत में पेश ही नहीं किया गया क्योंकि वसुंधरा इससे पीछे हट गई थीं।

पार्टी की राज्य इकाई ने यह भी दावा किया कि वसुंधरा के पुत्र के होटलों की कड़ी में ललित मोदी द्वारा किया गया निवेश कानूनी है और प्राधिकारियों को इस बारे में बताया गया था। कांग्रेस ने वसुंधरा राजे पर ललित मोदी की मदद करने का आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की है। पूरे विवाद को लेकर वसुंधरा ने चुप्पी साध रखी है हालांकि उनके कार्यालय ने उन पर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया है कि राजे को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए ये आरोप लगाए गए हैं।

भाजपा का कहना है कि वह वसुंधरा राजे का पूरी तरह समर्थन करती है। पार्टी ने उन्हें राज्य में ऐसी सबसे बड़ी और सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बताया है जिनके नेतृत्व में पार्टी ने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में उल्लेखनीय जीत हासिल की। वसुंधरा राजे ने नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के लिए लंदन यात्रा की अपनी योजना रद्द कर दी थी। पूर्व में उन्हें 27 जून से दो जुलाई तक लंदन यात्रा पर जाना था।

दिल्ली में नेताओं से मुलाकात नहीं करने को लेकर वसुंधरा विरोधी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल हर विवाद टालने की नीति पर चल रहा है। इसके कारण ही प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य नेताओं ने राजे से मुलाकात नहीं की। पार्टी के एक खेमे का मानना है कि बड़े नेताओं से राजे की मुलाकात का गलत संदेश जा सकता है। इसके साथ विवाद का कारण बने मुद्दे एक बार फिर उठ सकते हैं। इससे पार्टी की खराब होती छवि फिर से ज्यादा खराब होने का अंदेशा था। इसके अलावा केंद्रीय नेतृत्व ने एक बार राजे को क्लीन चिट दे ही दी है। इसके बाद राजे को राहत मिल ही गई है। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व से मिलने की अब कोई जरूरत नहीं है।

दूसरी तरफ नेताओं से बगैर मिले जयपुर लौटने से प्रदेश भाजपा के भीतर भी हलचल मच गई। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शुक्रवार को ही अपने समर्थक पूर्व मंत्री दिगंबर सिंह को मंत्री के दर्जे वाला बीस सूत्रीय कार्यक्रम समिति का उपाध्यक्ष मनोनीत कर दिया था। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वसुंधरा राजे पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के सहयोग से काम कर रही हैं। प्रदेश भाजपा में दिगंबर सिंह को वसुंधरा राजे का समर्थक माना जाता है। विधानसभा चुनाव हारने के बाद सिंह को उपचुनाव भी लड़वाया गया था जिसमें भी उन्हें हार मिली थी। वसुंधरा राजे अब नियमित तौर पर सरकारी कामकाज भी कर रही हैं। उन्होंने विवादों के दौरान भी कई सरकारी बैठकें की थीं।

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