अटल और आडवाणी से भी नाराज थे वरुण गांधी, क्या है मोदी से नाराजगी की वजह?

भले ही बीजेपी ने वरुण गांधी को पार्टी महासचिव बनाया हो लेकिन चाहे अटल बिहारी वाजपेयी का दौर रहा हो या नरेंद्र मोदी का, वरुण गांधी का पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कोई खास तालमेल नहीं रहा है।

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बीजेपा नेता वरुण गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (एक्सप्रेस फोटो)।

हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार में मंत्री पद के लिए दौड़ में बाजेपी सांसद वरुण गांधी का नाम भी आगे चल रहा था। हालांकि जब मोदी सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ तो वरुण गांधी को न तो कैबिनेट और न ही राज्य मंत्री बनाया गया। आखिर क्या वजह है कि वरुण गांधी, गांधी परिवार से संबंध होने के बाद भी बीजेपी में हाशिये पर हैं?

दरअसल, सांसद वरुण गांधी, 2004 में बीजेपी में शामिल हुए थे। तब से लेकर आज तक संसदीय चुनाव लड़ने के अलावा पार्टी की ओर से उन्हें सरकार में आज तक कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। भले ही पार्टी ने उन्हें पार्टी महासचिव बनाया हो लेकिन चाहे अटल बिहारी वाजपेयी का दौर रहा हो या नरेंद्र मोदी का, वरुण गांधी का पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कोई खास तालमेल नहीं रहा है।

वरुण गांधी से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा ‘द लल्लनटॉप’ पर बताया गया था। जब एंकर सौरभ द्विवेदी ने पत्रकार विजय त्रिवेदी से पूछा कि आपको क्या लगता है कि बीजेपी नेता वरुण गांधी और पीएम मोदी के बीच रार क्यों है? जवाब देते हुए पत्रकार ने बताया था, ‘मुझे जहां तक लगता है कि वरुण गांधी की एंट्री बीजेपी में देखेंगे तो समझ आएगा की समस्या कहां है। बीजेपी नेता प्रमोद महाजन ने अटल बिहारी वाजपेयी को ये सलाह दी थी कि राहुल गांधी के सामने वरुण गांधी को एक चुनौती के तौर पर खड़ा किया जाना चाहिए। आने वाले वक्त में ये गांधी परिवार के खिलाफ बीजेपी के हाथ में बड़ा हथियार साबित होगा।’

पत्रकार बताने लगे थे कि वरुण गांधी की बीजेपी में एंट्री के लिए वाजपेयी को मनाना आसान था क्योंकि वे महाजन की बात सुनते थे लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल वरुण खुद और उनकी मां मेनका गांधी थीं। पत्रकार ने बताया कि वरुण गांधी को बीजेपी की ओर से समझाया गया था कि कांग्रेस में रहोगे तो कभी भी नंबर एक नहीं बनोगे। बीजेपी में रहकर राहुल को मुकाबला दे सकते हो नंबर एक आसानी से बन सकते हो।

पत्रकार ने बताया था कि बाद में जब वरुण गांधी बीजेपी में आ गए और उन्हें 2004 में चुनाव के लिए टिकट नहीं मिला तो उनके मन में वाजपेयी और आडवाणी के खिलाफ काफी गुस्सा भर गया था। वरुण गांधी को उम्मीद थी कि बीजेपी में शामिल होने पर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी लेकिन उनकी उम्मीद के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ। विजय त्रिवेदी ने बताया था, ‘ मेरे सामने वरुण गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का नाम आदर से नहीं लिया। आमतौर पर राजनीति में ऐसा लोग करते नहीं थे। जिससे पता चलता है कि वरुण के मन में वाजपेयी और आडवाणी के प्रति गुस्सा था।’

पत्रकार विजय त्रिवेदी ने कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी की वरुण गांधी से नाराजगी की वजह भी बताई थी। उन्होंने बताया था कि मोदी इसलिए वरुण गांधी से नाराज हैं क्योंकि जब 2013 में मोदी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए बीजेपी द्वारा घोषित किया गया और आडवाणी नाराज हो गए तो उस समय वरुण गांधी ने आडवाणी के लिए यूपी में एक रैली आयोजित करवाई थी। इसके अलावा वरुण गांधी द्वारा खुद को सीएम बनाए जाने के लिए पोस्टर लगवाना भी बीजेपी और पीएम मोदी को रास नहीं आया था।

पत्रकार ने बताया कि नरेंद्र मोदी ने पीएम रहते हुए वरुण गांधी से आज तक औपचारिक मुलाकात से ज्यादा मुलाकात की ही नहीं है। कुल मिलाकर वरुण गांधी शुरुआत से आज तक अपनी जगह बनाने के लिए ही संघर्ष करत रहे।

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