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Varanasi: काशी विद्यापीठ की गेस्ट प्रोफेसर के नवरात्र पर किए पोस्ट पर विश्वविद्यालय की कार्रवाई, मचा बवाल

Kashi Vidyapeeth: लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत चंदन ने डॉ गौतम के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मैंने उस पोस्ट को देखा था। इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं था।

Varanasi: काशी विद्यापीठ की गेस्ट प्रोफेसर के नवरात्र पर किए पोस्ट पर विश्वविद्यालय की कार्रवाई, मचा बवाल
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी(फोटो सोर्स:mgkvpvonline)।

Varanasi: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गेस्ट प्रोफेसर के नवरात्र पर पोस्ट बवाल मचा हुआ है। पोस्ट को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर मिथिलेश कुमार गौतम के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई पर भी विवाद खड़ा होता दिख रहा है। दरअसल प्रोफेसर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में महिलाओं को नवरात्र से दूरी बनानी की बात कही थी। आरोप के मुताबिक पोस्ट में नवरात्र को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई थी।

क्या था पोस्ट में:

हिंदी में लिखे पोस्ट में कहा गया था, “महिलाओं के लिए नवरात्र के दौरान नौ दिनों का व्रत रखने की बजाय भारत के संविधान और हिंदू कोड बिल को पढ़ना बेहतर है। उनका जीवन भय और गुलामी से मुक्त होगा। जय भीम।” बता दें कि मिथिलेश कुमार गौतम काशी विद्यापीठ में राजनीति विज्ञान विभाग में अतिथि प्रोफेसर थीं।

प्रोफेसर गौतम की इस पोस्ट के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही उनके परिसर प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। इस कार्रवाई का जहां कुछ छात्रों ने समर्थन किया है तो वहीं कई छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर को दलित होने के नाते यह कार्रवाई झेलनी पड़ी है।

वहीं विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ सुनीता पांडे ने एनडीटीवी से बातचीक में बताया कि प्रोफेसर गौतम की टिप्पणी आपत्तिजनक थी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी भी धर्म के बारे में ऐसी टिप्पणी करने या महिलाओं के बारे में ऐसी टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। पांडे ने कहा कि उन्होंने जो कहा वह उचित नहीं है। एक शिक्षक को हमेशा ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

सुनीता पांडे ने बताया कि 29 सितंबर को छात्रों ने एक पत्र के माध्यम से प्रोफेसर गौतम के पोस्ट को लेकर शिकायत की थी। छात्रों ने कहा था कि डॉ गौतम की पोस्ट हिंदू धर्म के खिलाफ थी। डॉ पांडे ने बताया कि डॉ गौतम के खिलाफ छात्रों में आक्रोश था। ऐसे में स्थिति को देखते हुए प्रोफेसर गौतम को अपनी सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने की सलाह दी गई थी।

इसके अलावा भाजपा की स्टूडेंट विंग एबीवीपी के पदाधिकारी अनुज श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ गौतम की टिप्पणी गलत थी और विश्वविद्यालय ने उनपर कार्रवाई कर उचित कदम उठाया था। वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर रविकांत चंदन ने डॉ गौतम के खिलाफ हुई कार्रवाई पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मैंने उस पोस्ट को देखा था। इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं था।

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First published on: 01-10-2022 at 11:08:11 pm
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