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पौधे नहीं खा रहे ये बच्‍चे- पीएम के संसदीय क्षेत्र बनारस की इस तस्‍वीर पर डीएम की सफाई

वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने इंड‍ियन एक्‍सप्रेस से कहा क‍ि बच्चे घास या पौधे नहीं, बल्कि अखरी दाल और हरे चने के पौधों से बाल‍ियां न‍िकाल कर खा रहे थे।इनके परिवार के पास राशन कार्ड है और इस महीने के लिए इन लोगों को राशन भी मिला है।

सोशल मीडिया पर यह फोटो वायरल होने के बाद डीएम ने सफाई पेश की है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्‍वीर और इससे जुड़ी खबर को प्रशासन ने गलत बताया है। वायरल तस्‍वीर में कुछ बच्‍चे पौधे जैसी कोई चीज खाते द‍िख रहे हैं। यह तस्‍वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की है। इस तस्‍वीर के साथ स्‍थानीय मीड‍िया में छपी खबर में बताया गया क‍ि कोरोना वायरस से न‍िपटने के ल‍िए हुए लॉकडाउन के चलते खाने की कमी की वजह से बच्‍चों को पौधे खाने पड़ रहे हैं। बनारस के डीएम ने इसे गलत बताया है।

वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने इंड‍ियन एक्‍सप्रेस से कहा क‍ि बच्चे घास या पौधे नहीं, बल्कि अखरी दाल और हरे चने के पौधों से बाल‍ियां न‍िकाल कर खा रहे थे।इनके परिवार के पास राशन कार्ड है और इस महीने के लिए इन लोगों को राशन भी मिला है। उन्होंने कहा कि यह तस्‍वीर सामने आने के बाद इन्हें अतिरिक्त राशन भी दिया गया है।डीएम ने सोशल मीड‍िया पर खुद अपने बेटे के साथ एक फोटो भी डाली है। इसमें वह अखरी दाल और हरे चने की बालियां खाते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है क‍ि यह खाना सामान्‍य बात है और ये चीजें खाई जाती हैं।

बारागांव के थानाध्यक्ष संजय सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि उन्हें स्थानीय अखबारों के रिपोटर्स ने बताया कि मुसहर बस्ती में अनाज की कमी है और वहां लोग घास खाने को मजबूर हैं। इसके बाद तुरंत एसडीएम को फोन लगाया गया और तहसील के अधिकारियों से मुसहर बस्ती में लोगों की मदद करने के ल‍िए कहा गया। मुसहर परिवार के सदस्यों को 10 किलो चावल, तेल आलू और अन्य जरूरी सामान दिए गए। शुक्रवार को भी उनकी मदद के लिए कुछ सामान भेजा गया है।संजय सिंह ने आगे कहा कि वह खुद भी उस गांव का दौरा कर आए हैं।  उन्होंने कहा कि बच्चों के परिवार के कुछ लोग दिहाड़ी मजदूर हैं जबकि कुछ लोग भीख मांगते हैं। इस बीच बताया जा रहा है क‍ि यह खबर देने वाले स्‍थानीय अखबार व र‍िपोर्टर पर कार्रवाई हो सकती है। उन्‍हें नोट‍िस भेजे जाने की बात कही जा रही है। संभव है क‍ि उनकी ग‍िरफ्तारी भी हो सकती है।

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इस खबर पर समाजवादी पार्टी ने उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा था। समाजवादी पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा था, बनारस में मुसहरों की बस्ती में लोग घास खाने को मजबूर! सैनिटाइजर और मास्क दूर की बात, हाथ धोने के लिए साबुन तक नही। सरकार से अपील तत्काल खाद्य पदार्थों के साथ अन्य जरूरी सामान मुसहर बस्तियों तक उपलब्ध कराया जाए।

गौरतलब है कि बीते सितंबर में मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्लॉक स्थित शिउर स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को मिड डे मील में नमक रोटी परोसे जाने की खबर सामने आई थी जिसके बाद यह मामला काफी उछला था। जिसके बाद  मिर्जापुर जिला प्रशासन ने पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था।

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