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वाराणसी: CAA के खिलाफ प्रदर्शन में लाठीचार्ज, आरोप- भगदड़ में मारा गया 8 साल का मासूम; पिता ने यूं बयां किया दर्द

ढाबा में खाना पकाने वाले 38 वर्षीय सगीर के पिता वकील अहमद कहते हैं, “लगभग सात साल पहले मेरी पत्नी ने मुझे और मेरे पांच बच्चों को छोड़ दिया। फिर एक साल पहले मेरी 18 वर्षीय बेटी गौसिया नरगिस का लंबी बीमारी से निधन हो गया। और अब, सगीर भी चला गया है।

वाराणसी | Updated: January 4, 2020 2:59 PM

यूपी के वाराणसी में नए नागरिकता कानून के विरोध में 20 दिसंबर को पुलिस ने कथित रूप से बजरडीहा इलाके में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था। इसमें आठ साल का बच्चा सगीर की भगदड़ में मौत हो गई थी। पास में लल्लन ढाबा में खाना पकाने वाले 38 वर्षीय सगीर के पिता वकील अहमद कहते हैं, “हम अनपढ़ हैं और हमारे पास अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। वे पूरे दिन यहां-वहां खेलते हैं। हर दिन काम पर जाने से पहले मैं सगीर को कंचा खेलते हुए या गेंद से खेलते हुए या बाहर गली में अपनी छोटी लाल साइकिल की सवारी करते हुए देखता था। कौन सोचा था कि सड़कों पर खेलने से उसकी जान चली जाएगी? ”

सात साल पहले पत्नी और एक साल पहले बेटी की भी हो चुकी है मौत : एक कमरे के घर में माता-पिता, बच्चों और अपने भाई के परिवार समेत 10 लोगों के साथ रहने वाले वकील अहमद दरवाजे के बाहर बैठकर कहते हैं, “लगभग सात साल पहले मेरी पत्नी ने मुझे और मेरे पांच बच्चों को छोड़ दिया। फिर एक साल पहले मेरी 18 वर्षीय बेटी गौसिया नरगिस का लंबी बीमारी से निधन हो गया। और अब, सगीर भी चला गया है। ज्यादातर मुस्लिम बुनकरों की आबादी वाले बजरडीहा इलाके में घटना के कई दिन बाद भी कोई भी विरोध प्रदर्शन या आठ वर्षीय बच्चे की मौत के बारे में बात करने को तैयार नहीं हैं। यहां पर लगभग दो दर्जन पुलिस कर्मियों की तैनाती कई गई है।

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धार्मिक जुलूस समझकर भीड़ में शामिल हो गया था बच्चा : एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि “उस दिन शुक्रवार की नमाज के बाद बजरडीहा में मस्जिदों के 35-40 युवा तख्तियों और पंफलेट के साथ शांतिपूर्ण विरोध शुरू किए। जब वे धरारा बाज़ार पहुंचे, तब तक भीड़ एक हज़ार से अधिक हो चुकी थी। बच्चा (सगीर) उसको शायद धार्मिक जुलूस समझकर भीड़ में शामिल हो गया था। उन्होंने बताया कि “जब प्रदर्शनकारी धरारा बाज़ार से आधा किमी दूर छाई बाज़ार पहुंचे तो पुलिस ने उन लोगों को खुले मैदान की ओर भेज दिया और वहां बैठा दिया। फिर पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इससे लोग पास की गलियों में दौड़ने भागने लगे। किसी ने भी नहीं देखा कि भीड़ में कुछ बच्चे भी थे। सगीर शायद जमीन पर गिर गया और लोग उसके ऊपर भागे।”

दादी से कुछ दिन पहले कपड़े मांगे थे : सगीर की दादी शहनाज़ कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि सगीर छत से नीचे कब गया और भीड़ में शामिल हो गया। “यहां के बच्चों का सड़कों पर खेलना सामान्य बात है।” सगीर अपने पिता के साथ काम करता था और हमारी भी घरेलू काम में मदद करता था। कुछ दिनों पहले उसने मुझे उसके लिए नए कपड़े खरीदने के लिए कहा, लेकिन अब हम उस दिन पहनी हुई चप्पल भी नहीं पा सकते हैं।”

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