नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरों के गायन पर आपत्ति जताई जबकि कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन किया।

कांग्रेस ने कहा कि पार्टी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाये गए।

किस बात को लेकर हुआ विवाद?

कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान सोनिया गांधी अपने बगल में खड़े पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर इशारा कर कुछ कहते हुए नजर आईं। बीजेपी की आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ की शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी असहज हो गईं और पूरे गीत को गाए जाने के बजाय इसे रोकने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि राहुल गांधी ने भी इसे रोकने के लिए कहा।

बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी सोशल मीडिया पर सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि उन्हें ‘वंदे मातरम’ से इतनी नफरत क्यों है? उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान सोनिया गांधी नाराज हुईं और पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे रोकने को कहा।

सोनिया ने मांगी थी खड़गे के लिए कुर्सी- रमेश

दूसरी तरफ, कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का गायन रोकने की कोई कोशिश नहीं की गई। पार्टी सांसद जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी लाने के लिए कह रही थीं क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर, 1937 को कलकत्ता में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी. राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी। रमेश ने कहा कि उस बैठक में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर यह तय किया गया था कि कांग्रेस अधिवेशनों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती अंतरे गाए जाएंगे।

रमेश ने कहा कि तब से कांग्रेस के हर अधिवेशन में उन पंक्तियों को गाया जाता रहा है और कांग्रेस सेवा दल तथा पार्टी कार्यकर्ता भी इसे गाते हैं। उनका कहना था कि इस मुद्दे पर कोई विवाद नहीं है।

‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाए

रमेश ने कहा कि शनिवार को ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरों को गाया गया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में 16 घंटे चर्चा हुई थी और कांग्रेस ने अपना पक्ष रखा था। रमेश के अनुसार, उन्होंने सांसदों को ‘वंदे मातरम’ को लेकर 1937 में लिए गए फैसले का ऐतिहासिक संदर्भ भी बताया था।

केंद्र सरकार ने अगस्त, 2026 में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर कानूनी दर्जा देते हुए आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरों को गाया जाना जरूरी है।

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शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह बिना टेलीप्रॉम्प्टर के ‘वंदे मातरम’ सुनाकर दिखाएं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।