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Vande Bharat Express की इन सुविधाओं का फायदा उठाने के बजाए परेशान हो रहे ट्रेन यात्री!

Vande Bharat Express, Indian Railways News: बताया गया कि कई बार देखा गया है कि एसी का तापमान सेट कराने के लिए यात्री ट्रेन ऑपरेटर को बुला लेते हैं, जबकि यह सुविधा आपात्कालीन स्थिति के लिए होती है।

Vande Bharat Express, Indian Railways News: वंदे भारत एक्सप्रेस। (एक्सप्रेस फोटो)

Vande Bharat Express, Indian Railways News: देश की पहली सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस की कुछ आधुनिक सुविधाओं का फायदा उठाने के बजाए यात्री उनसे परेशान हो रहा हैं। लोगों कों रेलगाड़ी की खास सीटों से लेकर स्वचालित दरवाजों तक से समस्या हो रही है। हाल ही में इन बातों का खुलासा चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ईसीएफ) के एक दल ने किया।

दरअसल, ट्रेन की समीक्षा के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस में कुछ दिन पहले ईसीएफ का एक दल सफर कर रहा था। उसी के इंजीनियर एस श्रीनिवास के हवाले से ‘ईटी’ एक रिपोर्ट में बताया गया, “लोग पूछते हैं कि आखिर ये सीटें पूरी क्यों नहीं झुकती हैं, जैसे कि शताब्दी में होता है। फुट रेस्ट भी बढ़ जाता है, पर कई मौकों पर यात्री इसे जोर से झटका देते हैं, जिससे यह टूट जाता है।”

शिकायत करते हुए एक यात्री ने बताया, “ट्रेन में खाने वाली टेबल भी काफी छोटी है।” इतना ही नहीं, इसके स्वचालित दरवाजों का भी अचानक बंद हो जाना यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। दरअसल, यात्रियों के साथ उन्हें स्टेशन छोड़ने जो लोग आते हैं, वे कई बार बोगी के अंदर ही फंसे रह जाते हैं। चूंकि, ट्रेन दिल्ली के बाद ट्रेन का पहला हॉल्ट कानपुर होता है। ऐसे में ट्रेन के भीतर फंसे लोगों को वहां तक जाना पड़ता है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि कई बार देखा गया है कि एसी का तापमान सेट कराने के लिए यात्री ट्रेन ऑपरेटर को बुला लेते हैं, जबकि यह सुविधा आपात्कालीन स्थिति के लिए होती है। एक बार तो ट्रेन में सफर कर डॉक्टर ने इस काम के लिए आई कॉल स्वीकार की थी।

लोगों ने इसके अलावा ट्रेन में इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराए जाने को लेकर शिकायत दी है। हालांकि, एक ट्रेन अधिकारी के हवाले से कहा गया कि वाई-फाई सुविधा विमान की तरह है और इसमें नेट का प्रयोग नहीं किया जा सकता।

वंदे भारत एक्सप्रेस, नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलती है। यह पूरी वातानुकूलित रेलगाड़ी है, जिसे ट्रेन-18 के नाम से भी जाना जाता है। रेलवे के मुताबिक, 160 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली यह गाड़ी दिल्ली से बनारस के बीच का सफर महज आठ घंटों में पूरा कर लेती है, जबकि शताब्दी ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं।

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