गुजरात के वडोदरा में नाबालिग से हुए बहुचर्चित नवरात्रि गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए पांच आरोपियों को अब कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है। गुजरात सरकार ने मंगलवार, 25 अगस्त को विशेष POCSO अदालत से पांचों दोषियों को मौत की सजा देने या फिर उनकी प्राकृतिक मृत्यु तक उम्रकैद की सजा देने की मांग की।

यह मामला 4 अक्टूबर 2024 की रात का है, जब नाबालिग पीड़िता गरबा कार्यक्रम से लौटने के बाद अपने पुरुष मित्र के साथ शहर के बाहरी इलाके में एक सुनसान जगह पर गई थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसी दौरान पांच आरोपियों ने उसे निशाना बनाया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

22 महीने चला ट्रायल, पांचों आरोपी दोषी करार

विशेष POCSO अदालत ने करीब 22 महीने चले ट्रायल के बाद 20 अगस्त को पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया था। मंगलवार को अदालत में सजा पर बहस हुई। सभी दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया। अब अदालत 31 अगस्त को सजा सुनाएगी।

जिला सरकारी वकील अनिल देसाई ने अदालत से कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को कानून के तहत उपलब्ध अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की ओर से मौत की सजा की मांग की गई है और यदि अदालत इसे उचित नहीं मानती, तो दोषियों को उनकी आखिरी सांस तक जेल में रखने की सजा दी जाए।

सुनसान जगह पर बनाया नाबालिग को निशाना

अभियोजन पक्ष के अनुसार, नवरात्रि समारोह की दूसरी रात नाबालिग और उसका दोस्त वडोदरा शहर के बाहरी इलाके में एक सुनसान स्थान पर थे। इसी दौरान आरोपियों की नजर उन पर पड़ी।

आरोप है कि पांचों ने नाबालिग को निशाना बनाया। अभियोजन के मुताबिक, शुरुआत में दो आरोपियों ने उसके साथ यौन हिंसा की और इसके बाद बाकी तीन आरोपियों ने भी उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इस दौरान पीड़िता का मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।

पुलिस को गुमराह करने की कोशिश का आरोप

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने सबूत मिटाने और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि मोबाइल फोन विश्वामित्री नदी में फेंक दिया गया है।

फोन की तलाश के लिए दमकलकर्मियों की मदद ली गई। हालांकि, अभियोजन ने मामले में तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भी भरोसा किया। जांच में जुटाए गए CCTV फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट, DNA सैंपल और मेडिकल साक्ष्यों को भी अदालत के सामने पेश किया गया।

17 दिन में दाखिल हुई करीब 6,000 पन्नों की चार्जशीट

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तेजी से जांच आगे बढ़ाई। घटना के महज 17 दिन बाद POCSO अदालत में करीब 6,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई। चार्जशीट में करीब 100 गवाहों के बयान, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट, DNA सैंपल, CCTV फुटेज और अन्य दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्य शामिल किए गए थे।

45 गवाहों की हुई गवाही

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 45 गवाहों से अदालत में गवाही कराई। अभियोजन ने दलील दी कि मामला केवल मौखिक गवाही पर निर्भर नहीं था, बल्कि मेडिकल जांच, फॉरेंसिक सामग्री, DNA साक्ष्य, CCTV फुटेज और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी कड़ी से आरोप साबित हुए। विशेष लोक अभियोजक नयन सुखड़वाला ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित इस मामले में हर महत्वपूर्ण कड़ी को सफलतापूर्वक स्थापित किया।

कपड़ों से मिले वैज्ञानिक साक्ष्य भी अहम

अभियोजन पक्ष ने नाबालिग के कपड़ों से आरोपियों के शरीर से संबंधित द्रवों की फॉरेंसिक जांच के निष्कर्षों को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया। अभियोजन के अनुसार, इन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपों की पूरी कड़ी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। मामले की गंभीरता और इसे लेकर सार्वजनिक स्तर पर बने दबाव को देखते हुए गुजरात सरकार ने जिला सरकारी वकील अनिल देसाई के साथ दो विशेष लोक अभियोजकों को भी नियुक्त किया था।

अब सभी की नजरें 31 अगस्त पर हैं, जब विशेष POCSO अदालत पांचों दोषियों की सजा पर अपना फैसला सुनाएगी। गुजरात सरकार की ओर से मौत की सजा या आखिरी सांस तक उम्रकैद की मांग के बाद यह फैसला मामले का सबसे अहम चरण माना जा रहा है।

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