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गुजरात: वडोदरा में 250 से ज्यादा ‘सांप्रदायिक दंगे’! एसडीएम ने तैयार की सूची

यहां अशांत क्षेत्र कानून 1991 (Disturbed Areas Act) लागू करने को जायज ठहराने के लिए यह सूची तैयार की गई है। इस एक्ट के तहत, कलेक्टर शहर के किसी खास क्षेत्र या कस्बे को सांप्रदायिक टकरावों आदि के आधार पर 'अशांत क्षेत्र' घोषित करता है।

वडोदरा | September 4, 2019 9:03 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडियन एक्सप्रेस)

Sohini Ghosh

गुजरात के वडोदरा के सिटी सब डिविजनल मजिस्ट्रेट ने जिले के 14 पुलिस थानों के अंतर्गत हुए 256 ‘सांप्रदायिक दंगों’ के मामलों की सूची तैयार की है। दरअसल, यहां अशांत क्षेत्र कानून 1991 (Disturbed Areas Act) लागू करने को जायज ठहराने के लिए यह सूची तैयार की गई है। इस एक्ट के तहत, कलेक्टर शहर के किसी खास क्षेत्र या कस्बे को सांप्रदायिक टकरावों आदि के आधार पर ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित करता है।

‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किए जाने के बाद इन इलाकों में संपत्तियों की बिक्री के लिए जिला प्रशासन की मंजूरी लेनी पड़ती है। 14 अगस्त को गुजरात हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में एसडीएम महिपाल सिंह चुडासमा ने याचिकाकर्ता के उस दावे को खारिज किया, जिसके मुताबिक इन इलाकों में कोई दंगे या हिंसा की घटना नहीं हुई।

बत दें कि जमीयत-ए-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दाखिल याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि वडोदरा शहर को कानूनी तौर पर अशांत घोषित करने से जुड़े 30 सितंबर 2009 और 30 सितंबर 2014 के नोटिफिकेशंस रद्द किए जाए और उन्हें अवैध घोषित किया जाए। बता दें कि वडोदरा शहर के बहुत सारे इलाकों को एक्ट के सेक्शन 3 के तहत 30 सितंबर 2009 को नोटिफिकेशन जारी करके 5 साल के लिए ‘अशांत’ घोषित किया गया था।

बाद में रेवेन्यू डिपार्टमेंट की ओर से एक अन्य नोटिफिकेशन जारी करके इस समयावधि को बढ़ाकर 1 अक्टूबर 2014 से 30 सितंबर 2019 तक के लिए लागू कर दिया गया। इसके अलावा, अशांत क्षेत्र की सूची में कुछ अन्य इलाकों को भी जोड़ दिया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना दिमाग लगाए इन नोटिफिकेशंस को जारी कर दिया गया। अशांत क्षेत्र में खास तौर पर उन इलाकों को शामिल किया गया, जहां मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है।

एसडीएम की ओर से दाखिल हलफनामे में उन सांप्रदायिक घटनाओं की सूची है, जो पुलिस विभाग की ओर से मुहैया कराई गई है। इसके मुताबिक, 14 पुलिस थानों में 2014 से लेकर जुलाई 2019 तक सांप्रदायिक तनाव के 256 मामले दर्ज किए गए। इस सूची में दर्ज घटनाओं में सिर्फ दो मामले ऐसे हैं, जिसे दंगों की धारा सेक्शन 146 के तहत दर्ज किया गया।

वहीं, सूची में दर्ज 127 वारदात को सेक्शन 147 (उपद्रव के लिस दोषी ठहराना) के तहत दर्ज किया गया। वहीं, 59 मामलों को आईपीसी की धारा 148 (हथियार के साथ उपद्रव) के तहत दर्ज किया गया। इसके अलावा, सिर्फ दो मामले ऐसे थे जिसे सेक्शन 153 ए (दो समुदायों के बीच धर्म, भाषा, नस्ल आदि के आधार पर नफरत फैलाना) के तहत दर्ज किए गए। सांप्रदायिक तनाव वाले मामलों को अधिकतर इस धारा के तहत रजिस्टर किया जाता है।

कुछ मामले बेहद छोटे विवादों मसलन- पार्किंग को लेकर विवाद, सार्वजनिक जगह पर पेशाब करने, मुस्लिम शादी समारोह में लाउडपीकर बजाने पर झगड़े आदि से जुड़े हुए हैं। कुछ ऐसे एफआईआर को भी सूची में जगह मिली है जो ‘हिदू-मुस्लिम लव अफेयर या शादी’, गरबा कार्यक्रम में यौन उत्पीड़न और पथराव आदि को लेकर दर्ज की गई थीं।

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