UP: स्कूल में जातिगत भेदभाव की शिकायत करने वाले दलित प्रधान पति का आरोप, जान से मारने की मिल रही हैं धमकियां

ग्राम प्रधान के पति साहब सिंह ने कहा कि धमकी देने वाले खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे एक दलित को गांव का प्रधान नहीं रहने देंगे। वे मेरी हड्डियों को तोड़ने और यहां तक ​​कि मुझे गोली मारने की धमकी भी दे रहे हैं।

मैनपुरी जिले के सरकारी स्कूल में जातिगत भेदभाव की शिकायत करने वाले ग्राम प्रधान के पति को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

पिछले दिनों उत्तरप्रदेश के मैनपुरी जिले के दौदापुर गांव के सरकारी स्कूल में बच्चों के साथ जातिगत भेदभाव का मामला सामने आया था। दलित समुदाय से आने वाले गांव के प्रधान पति ने स्कूल में हो रहे भेदभाव का मामला उठाया था। मामला सामने आने के बाद स्कूल की प्रधानाध्यापिका को निलंबित कर दिया गया और दो रसोइयों को हटा दिया गया। जातिगत भेदभाव की शिकायत करने वाले दलित प्रधान पति को अब जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं जिसकी वजह से उन्हें गांव से बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस को रविवार को दलित प्रधान के घर पर ताला लगे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद जब इंडियन एक्सप्रेस ने स्कूल में जातिगत भेदभाव की शिकायत करने वाले दलित प्रधान पति साहब सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उन्हें उनके गांव के ठाकुरों द्वारा धमकी दी जा रही थी क्योंकि उन्होंने शिकायत की थी कि उनके गांव के स्कूल में अनुसूचित जाति के बच्चों के द्वारा मध्याह्न भोजन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन अलग रखे जाते थे और बच्चे उस बर्तन को स्वयं धोते थे।

साहब सिंह ने यह भी कहा कि धमकी देने वाले खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे एक दलित को गांव का प्रधान नहीं रहने देंगे। उन्होंने मुझ पर भी जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। वे मेरी हड्डियों को तोड़ने और यहां तक ​​कि मुझे गोली मारने की धमकी भी दे रहे हैं। वे गांव में हंगामा भी कर रहे हैं। मैं इसकी शिकायत को लेकर जिले के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से भी मिलने आया था, लेकिन वे नहीं मिले। अब मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित सभी अधिकारियों से इसकी शिकायत करूंगा। हालांकि इतना कहते ही साहब सिंह ने कॉल काट दिया।

वहीं साहब सिंह को कथित तौर पर धमकी देने वाले ठाकुर गजेंद्र प्रताप सिंह से जब इंडियन एक्सप्रेस ने संपर्क किया तो उन्होंने धमकी देने की बात से इनकार किया। गजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मैंने किसी को धमकी नहीं दी है। मुझे इस मामले से क्या लेना-देना है। उन्होंने साहब सिंह पर “गांव में जातिगत दुश्मनी” फैलाने का आरोप लगाया। गजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि स्कूल सुचारू रूप से चल रहा था। सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन प्रधानपति ने स्कूल जाकर नेतागिरी की और रसोइयों को धमकाया। साथ ही उन्होंने प्रधानाध्यापिका के निलंबन को गलत ठहराते हुए कहा कि वे बहुत अच्छी हैं और उन्हें फिर से बहाल किया जाना चाहिए। 

इसके अलावा उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान के पति द्वारा झूठ फैलाया जा रहा है और उसे स्कूल के कामकाज में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। हर जगह स्कूलों में ऐसा ही होता है। बच्चे तय करते हैं कि वे अपनी थाली कहां रखेंगे। अब साहब सिंह कह रहे हैं कि उनके समुदाय का ही कोई व्यक्ति स्कूल में खाना बनाएगा और सभी छात्रों को वह खाना खाना पड़ेगा। लेकिन गांव के बुजुर्गों ने कहा है कि अगर ग्राम प्रधान के समुदाय का कोई व्यक्ति खाना बनाता है तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। हमारी साधारण मांग यह है कि चीजें वैसी ही हों जैसी पहले थीं और साथ ही ग्राम प्रधान के पति के ऊपर कार्रवाई की जानी चाहिए।  

दरअसल पिछले दिनों उत्तरप्रदेश में हुए पंचायत चुनावों में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से साहब सिंह की पत्नी मंजू देवी प्रधान पद के लिए चुनी गईं। कुछ दिन पहले गांव के ही कुछ लोगों ने प्रधान पति साहब सिंह से स्कूल में हो रहे जातिगत भेदभाव की शिकायत की थी। जिसके बाद साहब सिंह ने स्कूल जाकर इसका निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि स्कूल की रसोई में सिर्फ 10-15 प्लेटें ही रखी जाती थी। बाकी दलित और ओबीसी समुदाय से आने वाले बच्चों की थालियां बाहर रखी जाती थी। यहां तक कि बच्चों को अपनी थालियां भी खुद ही धोनी पड़ती थी।

जिसके बाद साहब सिंह ने इसकी शिकायत मैनपुरी जिला प्रशासन से की। मैनपुरी प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए स्कूल की प्रधानाध्यापिका गरिमा राजपूत को निलंबित कर दिया और दो रसोइयों – सोमवती देवी और लक्ष्मी देवी को कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर मैनपुरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी कमल सिंह ने शनिवार को कहा कि नवनिर्वाचित प्रधान मंजू देवी के पति द्वारा स्कूल में जातिगत भेदभाव की शिकायत को सही पाया गया। 

उन्होंने कहा कि हमें बुधवार को इस बारे में शिकायत मिली और निरीक्षण के लिए एक टीम को स्कूल भेजा गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी व अन्य पदाधिकारियों ने विद्यालय का दौरा किया। इस दौरान स्कूल की रसोइया सोमवती और लक्ष्मी देवी ने अनुसूचित जाति के छात्रों के बर्तनों को छूने से इनकार कर दिया और कहा कि अगर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया तो वे स्कूल में काम नहीं करेंगे। उन्होंने जातिसूचक गालियों का भी इस्तेमाल किया। जिसके बाद दोनों रसोइयों को हटा दिया गया और साथ ही स्कूल की प्रधानाध्यापिका गरिमा राजपूत को भी निलंबित कर दिया गया।

हालांकि मैनपुरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दावा किया कि ग्रामीणों के बीच समझौता हो गया है। दोनों पक्ष स्कूल को चलने देने पर राजी हो गए हैं। गांव में सबने मान लिया है कि स्कूल चलना चाहिए। हमारा फोकस बच्चों की पढ़ाई पर है और इसमें कोई रुकावट नहीं आएगी। कल से स्कूल फिर से खुल जाएगा और मध्याह्न भोजन परोसा जाएगा. साथ ही उन्होंने प्रधानाध्यापिका के निलंबन को लेकर कहा कि निलंबन और रसोइयों का निष्कासन अभी जारी रहेगा। निलंबन जारी रखा जाए या नहीं, इस पर बाद में विचार किया जाएगा।  

इस पूरे मामले को लेकर जब मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान से शिकायत मिलने के बाद इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं गांव के प्रधान के पति से नहीं मिला, लेकिन अगर वह कल मिलने आते हैं, तो मैं उनकी शिकायत लूंगा और अगर जरूरत पड़ी तो कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा दी जाएगी।

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