सोशल मीडिया पर एक बार फिर निहंग सिखों की चर्चा है। निहंग सिखों पर आरोप है कि उन्होंने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के नगरासू में स्थित एक गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया है। मौके पर पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान तैनात हैं जबकि सेना के जवान भी नगरासू पहुंच गए हैं।
गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर शनिवार शाम करीब चार बजे चढ़े निहंग सिख अभी भी वहीं डटे हुए हैं। गुरुद्वारे में छह से आठ निहंग सिख अभी भी मौजूद हैं। पुलिस ने बताया कि निहंगों के पास भाला, तलवार और कुल्हाड़ी भी हैं।
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर ने निहंग सिखों को समझाने की कोशिश की है लेकिन तीसरे दिन भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली है। इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी से बातचीत की है। हालात और ना बिगड़ें इसके लिए रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग में रविवार को कई घंटे तक इंटरनेट सेवाओं को बंद करना पड़ा।
निहंग सिखों के गुरुद्वारे की छत पर चढ़ने और तलवारें लहराने के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं।
क्यों भड़के हुए हैं निहंग सिख?
आखिर निहंग सिख किस बात को लेकर भड़के हुए हैं, यह जानना जरूरी है। मामला यह है कि 16 जून को कर्णप्रयाग के बाजार में पार्किंग को लेकर निहंग सिखों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हो गया था। इस दौरान निहंग सिखों ने तलवारों से स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया था। पुलिस ने चार निहंग सिखों को गिरफ्तार कर लिया था। निहंग सिख अपने साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा उनकी मांग है कि कर्णप्रयाग की घटना के लिए स्थानीय लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा बताया है। निहंग सिख चमोली पुलिस द्वारा कर्णप्रयाग की घटना को लेकर दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग भी कर रहे हैं।
अफवाहों पर ध्यान ना दें- डीएम
रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान ना दिया जाए और गुरुद्वारे में सभी काम पहले की ही तरह चल रहे हैं। डीएम के मुताबिक, गुरुद्वारे पर कब्जा किए जाने, किसी को बंधक बनाए जाने और किसी भी प्रकार की हिंसा की बात केवल अफवाह है।
गुरुद्वारे में रुकते हैं सिख तीर्थयात्री
बदरीनाथ-राजमार्ग पर रुद्रप्रयाग और गौचर के बीच नगरासू में कुछ साल पहले इस गुरुद्वारे को बनाया गया था। इस गुरुद्वारे का इस्तेमाल श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आने-जाने वाले सिख तीर्थयात्री करते हैं। गुरुद्वारे को बनाने वाले सरदार सुखदेव सिंह और सरदार बेअंत सिंह इसके प्रबंधन का जिम्मा भी संभालते हैं।
बेअंत सिंह का कहना है कि पंजाब के मोहाली से निहंग सिख शनिवार शाम करीब चार बजे गुरुद्वारे पहुंचे और कर्णप्रयाग में हुई घटना के विरोध में प्रदर्शन के लिए आने वाले सिख प्रदर्शनकारियों को ठहराने की मांग की।
बेअंत सिंह के मुताबिक, निहंग सिखों ने 50-60 कमरों की व्यवस्था करने को कहा लेकिन जब उनसे कहा गया कि गुरुद्वारे की ओर से इतना इंतजाम नहीं किया जा सकता तो निहंगों ने मारपीट और हंगामा शुरू कर दिया। बाद में वे छत पर चढ़ गए और तीसरी मंजिल के एंट्री गेट को बंद कर उस पर कब्जा कर लिया। उन्होंने बताया कि वे कर्णप्रयाग घटना में गिरफ्तार किए गए निहंग सिखों को छोड़ने तथा दूसरे पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्होंने गुरुद्वारे में पानी की सप्लाई को काट दिया और छत पर लगे सोलर पैनलों में तोड़फोड़ की है।
किसान आंदोलन से चर्चा में आए थे निहंग सिख
इससे पहले साल 2020-21 में दिल्ली के बॉर्डर्स पर हुए किसान आंदोलन के दौरान निहंग सिख काफी चर्चा में रहे थे। निहंग सिख पंजाब से आए थे और दिल्ली में कृषि कानूनों के विरोध में धरना दे रहे किसानों के समर्थन में बॉर्डर्स पर बैठे थे।
किसान आंदोलन के दौरान सिंघू बॉर्डर के पास दलित समुदाय के लखबीर सिंह की हत्या कर दी गई थी। इसका आरोप निहंग सिखों पर ही लगा था। किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने भी लखबीर सिंह की हत्या के लिए निहंग सिखों को दोषी ठहराया था।
निहंग सिख नीले कपड़े पहनते हैं। ये अपने साथ तलवार, भाला और कुछ अन्य हथियार रखते हैं। सिख इतिहास में कहा जाता है कि निहंगों ने सिख धर्म को बचाने के लिए मुगलों से लड़ाई लड़ी थी। निहंग सिख घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्ध में काम आने वाली जरूरी बातों को सीखते हैं और डेरे में रहते हैं।
