उत्तराखंड में लगा राष्ट्रपति शासन, रावत सरकार बर्खास्त, कांग्रेस ने कहा- अदालत में जाएंगे

हरीश रावत सरकार की बर्खास्तगी से 28 मार्च को प्रस्तावित विश्वास मत अब निष्प्रभावी हो गया है।

BJP, MLA, Bhimlal Arya, former BJP MLA, Congress, CM Harish Rawatउत्तराखंड सीएम हरीश रावत (फाइल फोटो)

नौ दिन से जारी राजनीतिक नाटक और अनिश्चितता को समाप्त करते हुए केंद्र ने रविवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। साथ ही सत्तारूढ़ कांग्रेस में विद्रोह के बीच संवैधानिक अव्यवस्था का हवाला देते हुए विधानसभा को निलंबित कर दिया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश पर रविवार सुबह संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत उद्घोषणा पर हस्ताक्षर करते हुए हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांगे्रस सरकार को बर्खास्त कर दिया और विधानसभा को निलंबित कर दिया। कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतंत्र की हत्या और काला दिन करार देते हुए इसकी निंदा की और कहा कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी। इस बीच सीआरपीएफ के पूर्व डीजी प्रकाश मिश्रा और पूर्व केंद्रीय संस्कृति सचिव रविंद्र सिंह को उत्तराखंड के राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया गया।

केंद्र का नजरिया यह था कि 18 मार्च के बाद रावत सरकार का बना रहना अनैतिक व असंवैधानिक है। क्योंकि उस दिन विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के नौ बागी विधायकों सहित 35 विधायकों की ओर से मत विभाजन की मांग को अनुमति नहीं देने की विवादित परिस्थितियों में विनियोग विधेयक को पारित घोषित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार देर रात यहां कैबिनेट की आपातकालीन बैठक हुई। मोदी बैठक में शामिल होने के लिए असम की यात्रा को बीच में छोड़कर राष्ट्रीय राजधानी आए थे।

कैबिनेट ने राज्यपाल केके पॉल से मिली कई रपटों पर विचार किया। जिनमें उन्होंने राजनीतिक स्थिति को अस्थिर बताया था और राज्य विधानसभा में सोमवार को प्रस्तावित शक्ति परीक्षण में हंगामा होने की आशंका को लेकर चिंता जताई थी। समझा जाता है कि मुख्यमंत्री रावत के खिलाफ हुए और शनिवार को सार्वजनिक रूप से सामने आए स्टिंग आपरेशन की कथित सीडी कैबिनेट के फैसले में एक कारक थी। जिसने इसे खरीद फरोख्त का एक मामला माना। खबर है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रपति को शनिवार रात कैबिनेट की सिफारिश के आधार के बारे में बताया।

रावत सरकार की बर्खास्तगी से 28 मार्च को प्रस्तावित विश्वास मत अब निष्प्रभावी हो गया है। इससे पहले खबरें थीं कि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने नौ बागी कांग्रेस विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया। जिससे रावत विश्वास मत हासिल करने में सफल हो सकते थे। कांग्रेस की ओर से साजिश की आशंका जताने के बीच जेटली ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने को सही ठहराया और कहा कि हरीश रावत सरकार 18 मार्च से असंवैधानिक और अनैतिक थी जब गिरने के बावजूद विनियोग विधेयक पारित हुआ दिखाया गया।

जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन लगाने) को लागू करने का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता क्योंकि उत्तराखंड में पूरी तरह से संवैधानिक अव्यवस्था थी। केंद्रीय कैबिनेट के लिए राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने के बहुत अच्छे आधार थे- मुख्यमंत्री 18 (मार्च) को बहुमत खो चुके थे और उनका बना रहना असंवैधानिक और अनैतिक था। बकौल जेटली यह समय की मांग थी कि सरकार को बर्खास्त किया जाए।

उधर कांग्रेस ने इस फैसले की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया और कहा कि यह दिखाता है कि भाजपा का लोकतंत्र में भरोसा नहंी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रपति शासन सदन में शक्ति परीक्षण से एक दिन पहले लगाया गया क्योंकि केंद्र जानता था कि मुख्यमंत्री हरीश रावत अपना बहुमत साबित करने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा, ‘हम अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे। हम राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर करेंगे और इसे वापस लिए जाने की मांग करेंगे।’

उन्होंने कहा, ‘हम अदालत में उन्हें कानून बताएंगे। हम अदालत को दर्शाएंगे कि केंद्र सरकार में बैठे लोग ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ की अपनी नीति की वजह से कांग्रेस शासित प्रत्येक राज्य को अस्थिर करने के लिए जिम्मेदार हैं।’ सिब्बल ने कहा, ‘मैं हैरान हूं कि कोई सरकार जो लोकतंत्र और संविधान में विश्वास करती है वो किसी पार्टी की विरासत को समाप्त करने की कोशिश करेगी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा खरीद-फरोख्त की कला में सिद्धहस्त है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह मोदी सरकार की तानाशाही, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक सोच का जबरदस्त और बेशर्म उदाहरण है। नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने राज्यपाल की संस्था का दुरूपयोग कर राज्यों में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कांग्रेस सरकारों को गिराने के लिए लोकतांत्रिक नियमों और संवैधानिक परंपराओं को ताक पर रख दिया। आजाद ने उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार को गिराने को राज्य के लोगों की आकांक्षाओं का गला घोंटना बताया। जो कि भाजपा को उसके अहंकार और खुमार का मुंहतोड़ जवाब देंगे। पार्टी महासचिव शकील अहमद ने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा में विश्वासमत के ठीक एक दिन पहले मोदी सरकार की कार्रवाई ने संकेत दिया कि भाजपा हारने जा रही थी।

राज्य में राजनीतिक संकट उस समय पैदा हुआ जब विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा में विनियोग विधेयक पारित घोषित कर दिया था। जबकि भाजपा और कांग्रेस के बागी नेता दावा कर रहे थे कि उनकी मत विभाजन की मांग को अनुमति नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उपस्थित बहुसंख्यक सदस्यों की ओर से ध्वनिमत से विधेयक गिराया गया लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उचित ढंग से मतविभाजन में इसका परीक्षण नहीं किया और इसे पारित घोषित कर दिया।

विपक्ष का दावा था कि उसके पास उस दिन सदन में उपस्थित 67 विधायकों में से कांग्रेस के नौ बागी नेताओं सहित 35 विधायकों का समर्थन था। भाजपा ने कहा कि 35 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पहले से पत्र लिखकर कहा था कि वे विधेयक के खिलाफ मत देंंगे लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया। शनिवार रात केंद्रीय कैबिनेट ने इन खबरों के बीच बैठक की कि विधानसभा अध्यक्ष ने बागी कांग्रेसी विधायकों को अयोग्य ठहराया है। जिससे संकटग्रस्त सरकार को मदद मिल सकती थी।

राष्ट्रपति शासन लगाए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके पूर्व कदम नाकाम होने पर उसने इतना बड़ा कदम उठाया। लेकिन फैसले को सही ठहराते हुए अरुण जेटली ने दलील दी कि रावत सदन का संयोजन बदलने के लिए लालच और खरीद फरोख्त में समयावधि का प्रयोग करना चाहते थे- नौ में से हर दिन संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ। रावत के खिलाफ स्टिंग आपरेशन के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब कैमरे पर पकड़े गए एक मुख्यमंत्री की ओर से खरीद फरोख्त को लेकर मजबूत सबूत हैं। रावत के आरोपों पर जेटली ने एक ऐसे व्यक्ति की टिप्पणियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जो खुद पद और धन का प्रस्ताव देते हुए कैमरे पर पकड़ा गया। जेटली ने विधानसभा अध्यक्ष पर भी दलबदलू कानून का भेदभावपूर्ण प्रयोग का आरोप लगाया।

संविधान की खुलेआम धज्जियां उड़ार्इं केंद्र सरकार ने : रावत

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के विरोध में रविवार को जहां कांग्रेसियों ने प्रदेश में काला दिवस, वहीं भाजपा ने इसे लोकतंत्र की विजय दिवस के रूप में मनाया और भाजपा मुख्यालय में जमकर आतिशबाजी की।राष्ट्रपति शासन लगने के बाद हरीश रावत राज्यपाल डॉ. केके पॉल से मिलने राजभवन गए। वहीं राज्यपाल पॉल ने राज्य के मुख्यसचिव शत्रुघ्न सिंह और राज्य के डीजीपी बीएस सिद्धू को राजभवन तलब किया। पूरे राज्य में इस वक्त धारा-144 लागू कर दी गई है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने की भनक राज्य सरकार को आखिर तक नहीं लगी। निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत और विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने आशंकाओं के बीच भ्रम की स्थिति में रहे।

जहां सूबे में राष्ट्रपति शासन लागू करने का भाजपा और बागी कांग्रेसियों ने स्वागत किया है वहीं कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए राष्ट्रपति शासन को लोकतंत्र की हत्या बताया। हरीश रावत ने सूबे में राष्ट्रपति शासन लागू करने को लोकतंत्र की हत्या बताया है। कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ उत्तराखंड की जन आकांक्षाओं के खून से रंगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक निर्वाचित सरकार को सदन के पटल पर बहुमत साबित करने का मौका तक नहीं दिया। और इस तरह केंद्र सरकार ने खुलेआम संविधान की धज्जियां उड़ाईं। रावत ने आरोप लगाया कि राज्यपाल पर भाजपा और केंद्र सरकार द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। और भाजपाई उनकी सरकार को गिराने की लगातार धमकियां दे रहे थे। रावत ने कहा कि वे भाजपा और केंद्र सरकार के इस अन्याय के खिलाफ जनता की अदालत में जाएंगे और जनता अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा को करार जवाब देगी। रावत ने कहा कि उनकी सरकार को सदन में बहुमत साबित करने से 24 घंटे पहले ही हटाकर संविधान की खुलेआम धज्जियां उड़ाई। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती पर संविधान की खुलेआम हत्या की। भाजपा बीते दो सालों से उनकी सरकार के खून की प्यासी थी।

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और बागी कांग्रेसी विधायकों के नेता विजय बहुगुणा ने कहा कि 18 मार्च को ही विधानसभा में सरकार हार गई थी और तब से गैर संवैधानिक तरीके से हरीश रावत की अल्पमत सरकार सत्ता से चिपकी हुई थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन का वे स्वागत करते हैं और इसके लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का धन्यवाद देते हैं। बहुगुणा ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है।
भाजपा नेता सतपाल महाराज ने हरीश रावत सरकार को माफियाओं और लुटेरों की सरकार बताते हुए कहा कि आज उत्तराखंड माफिया राज से मुक्त हुआ है। लोकतंत्र की जीत हुई है। बागियों के नेता हरक सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री का सरकारी घर माफियाओं और लुटेरों का अड्डा बन गया था।

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सांसद भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन का स्वागत करते हुए कहा कि आज उत्तराखंड को राक्षस राज से मुक्ति मिल गई है। रावत सरकार भ्रष्टाचार की पर्याय बन गई थी। 18 मार्च को ही रावत सरकार सदन में गिर गई थी। परंतु बेशर्मी से रावत सत्ता से चिपके हुए थे। कोश्यारी ने कहा कि रावत के अंदर सच्चे पहाड़ी का डीएनए होता तो वे 18 मार्च को ही अपनी सरकार के अल्पमत में आने पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देते।

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