उत्तराखंडः कांग्रेस की ज़मीन में सेंध लगाने में जुटी भाजपा? पूर्व कांग्रेसी सीएम एनडी तिवारी को मिलेगा यह सम्मान

एनडी तिवारी के जरिए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने का मास्टर स्ट्रोक खेला, जिसको लेकर कांग्रेस खेमे में हलचल है। बता दें कि ये दूसरा मौका है जब धामी सरकार ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी के जरिए उनके समर्थकों और चाहने वालों को साधने की कोशिश की है।

pushkar singh dhami,ND tiwari, Congress
एनडी तिवारी उत्तराखंड की सियासत में अकेले ऐसे मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है(फोटो सोर्स: फाइल/PTI)।

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने कांग्रेसी के वरिष्ठ दिवंगत नेता नारायण दत्त तिवारी(एनडी तिवारी) को उत्तराखंड गौरव सम्मान देने का फैसला किया है। इस कदम को लेकर कांग्रेसी खेमे हलचल देखी जा रही है। दरअसल विपक्षी नेताओं का कहना है कि एनडी तिवारी को सम्मान देने के बहाने भाजपा कांग्रेस के आधार वोटों में सेंध लगाना चाह रही है।

गौरतलब है कि एनडी तिवारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। पुराने कांग्रेसी नेताओं और खासकर ब्राह्मण नेताओं में उनकी अपनी अलग पहचान थी। माना जा रहा है कि उत्तराखंड में एनडी तिवारी के नाम को भुनाने के लिए भाजपा ने उन्हें गौरव सम्मान देने का फैसला किया है। बता दें कि यह ऐलान 9 नवंबर को उत्तराखंड के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर पुष्कर सिंह धामी की भाजपा सरकार ने किया।

राज्य सरकार ने ‘उत्तराखंड गौरव सम्मान-2021’ के लिए कुल पांच नाम चुने हैं। जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी (मरणोपरांत), प्रसिद्ध लेखक रस्किन बॉन्ड, पर्यावरणविद् डॉ अनिल प्रकाश जोशी, प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी और पर्वतारोही बचेंद्री पाल के नाम शामिल हैं। एनडी तिवारी को भाजपा द्वारा सम्मान देने को लेकर कांग्रेस दिवंगत नेता की विरासत को हथियाने के प्रयास के रूप में देख रही है।

राज्य सरकार के इस ऐलान पर उत्तराखंड कांग्रेस महासचिव (संगठन) मथुरा दत्त जोशी ने सवाल पूछा कि आखिर पिछले चार सालों में भाजपा ने तिवारी का सम्मान क्यों नहीं किया। वहीं भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस कदम से लोगों में यह संदेश जाएगा कि धामी सरकार सकारात्मक मानसिकता के साथ काम करती है।

बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि तिवारी को सम्मानित कर पार्टी अपने पक्ष में चुनावी समीकरण साधना चाहती है। जहां यूपी में विपक्षी दल ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं भाजपा उत्तराखंड में ठाकुर बनाम ब्राह्मण और कुमाऊं बनाम गढ़वाल के जरिए चुनावी क्षेत्रों में लाभ पाना चाहती है।

बता दें कि राज्य के अधिकांश लोग इस बात से अवगत हैं कि उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेता हरीश रावत एनडी तिवारी के साथ कभी भी सहज नहीं थे। ऐसे में भाजपा की नजर एनडी तिवारी के समर्थकों और चाहने वालों पर है।

उल्लेखनीय है कि राज्य गठन के बाद 2002 में पहली निर्वाचित सरकार तिवारी मुख्यमंत्री बने थे। पर्वतीय राज्य में औद्योगिक विकास की नींव एनडी तिवारी ने रखी थी और उनके कार्यकाल में राज्य में कई बड़े उद्योग स्थापित हुए थे।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट