उत्तराखंडः भारत-चीन सीमा पर जोशीमठ में फटा ग्लेशियर, कम से कम 8 की मौत, सेना ने करीब 400 लोगों को रेस्क्यू किया

सूबे के सीएम तीरथ सिंह रावत इसे लेकर एक अलर्ट भी जारी किया है। घटना देर रात की बताई जा रही है। घटना कितनी बड़ी है, इसका ब्योरा नहीं मिल सका है।

Uttarakhand, Avalancheउत्तराखंड के जोशीमठ में हुआ हिम्सखलन। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर जोशीमठ स्थित नीति घाटी में शुक्रवार देर रात ग्लेशियर फट गया। इसके बाद सेना ने मोर्चा संभालते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बताया गया है कि हादसे में कम से कम 8 लोगों की जान गई है, वहीं  सेना ने क्षेत्र में सड़क बनाने का काम कर रहे बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के कैंप से करीब 400 लोगों को बचाया गया है। सूबे के सीएम तीरथ सिंह रावत इसे लेकर एक अलर्ट भी जारी किया है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, जोशीमठ में खराब मौसम होने की वजह से आगे कोई भी अभियान चलाने में देरी हो रही है।

सेना ने बयान जारी कर कहा कि जहां हादसा हुआ, वहां सड़क के पास ही एक BRO का कैंप लगा था। इसके अलावा एक सेना का कैंप बीआरओ के सुमना स्थित कैंप से तीन किमी ही दूर स्थित था। बताया गया है कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां पिछले पांच दिनों से भारी बारिश और बर्फबारी हुई है।

इससे पहले घटना के बाद रावत ने अपने ट्वीट में लिखा- नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली है। इस संबंध में मैंने एलर्ट जारी कर दिया है। मैं निरंतर जिला प्रशासन और बीआरओ के सम्पर्क में हूं। जिला प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दे दिए हैं। एनटीपीसी एवं अन्य परियोजनाओं में रात के समय काम रोकने के आदेश दे दिए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना होने पाए।

उधर, बार्डर टॉस्क फोर्स के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने बताया कि जोशीमठ पर ग्लेशियर फटा। तत्काल प्रभाव से राहत कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, कितना नुकसान है इसके बारे में कोई अपडेट नहीं है। सरकार ने अब तक ज्यादा जानकारी नहीं दी है।

चमोली में फरवरी में हुई थी ऐसी ही घटना: गौरतलब है कि फरवरी में उत्तराखंड के चमोली जिले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट जाने के कारण ऋषिगंगा घाटी में अचानक विकराल बाढ़ आ गई थी। हादसे में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि ऋषिगंगा में आई जल प्रलय का वेग अलकनंदा नदी में आते-आते थम गया। इस कारण नदी तट पर बसे शहरों और कस्बे इसके प्रकोप से बच गए।

तपोवन से लेकर हरिद्वार में स्थित गंगा के मैदानी तटों को खाली कराया गया। लेकिन राहत की बात यह रही कि ऋषिगंगा और धौली गंगा की संकरी और तेज ढलान वाली घाटी में उफानाती बाढ़, अलकनंदा की अपेक्षाकृत ज्यादा चौड़ी तटों पर आकर शांत होने लगी। यही कराण है कि जानमाल का नुकसान अलकनंदा तट पर ही देखने को नहीं मिला।

Next Stories
1 कोरोना टीका: 28 अप्रैल से 18 साल से अधिक उम्र वाले COWIN ऐप पर ऐसे कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन
2 POCO M2 Reloaded भारत में लॉन्च, Redmi के इस फोन पर पड़ेगा भारी, जानें कीमत व फीचर्स में अंतर
आज का राशिफल
X