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उत्तराखंड: ट्रैक के ट्रायल के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 4 लोगों की मौत, CM ने DM को दिए जांच के आदेश

डबल ट्रैक पर ट्रायल के लिए विशेष ट्रेन दिल्ली से बुलाई गई थी। डबल ट्रैक को परखने के लिए इसपर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ाया गया।

rail, uttarakhandतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। फोटो सोर्स – (Express Photo by Deepak Joshi)

इधर उत्तराखंड में रेलवे ट्रैक के ट्रायल के दौरान बड़ा ट्रेन हादसा हुआ है। राज्य के हरिद्वार में रेलवे के डबल ट्रैक के ट्रायल के दौरान ट्रेन ने 4 लोगों को रौंद दिया। ट्रायल के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 4 लोगों की मौत के बाद हंगामा खड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि यह हादसा हरिद्वार रेल मार्ग पर जमालपुर रेलवे फाटक के करीब हुआ है। पिछले कुछ दिनों से लक्सर हरिद्वार रेल मार्ग पर डबल ट्रैक बिछाने का काम चल रहा था। इसकी वजह से यहां कई ट्रेनों के परिचालन को पहले रोका भी गया था।

डबल ट्रैक पर ट्रायल के लिए विशेष ट्रेन दिल्ली से बुलाई गई थी। डबल ट्रैक को परखने के लिए इसपर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन को दौड़ाया गया। इसी दौरान जमालपुर फाटक के पास 4 लोग ट्रेन की चपेट में आ गये। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में कुछ अन्य लोग जख्मी भी हुए हैं। जिनका इलाज अभी अस्पताल में चल रहा है। इस हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि कि प्रशासन तथा रेलवे से जुड़े कई अधिकारी मौके पर भी पहुंचे। बहरहाल इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने डीएम को जांच के आदेश दिये हैं। उन्होंने घायल लोगों के बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने का आदेश भी दिया है।

बता दें कि लक्सर-हरिद्वार रेल मार्ग पर ट्रैक के दोहरीकरण का कार्य दो साल से चला आ रहा था। अभी तक इस रूट पर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेनें गुजरती आ रही हैं। दोहरीकरण के बाद 10 जनवरी से ट्रेनों की स्पीड दोगुनी यानि 100 किलोमीटर प्रतिघंटा होनी है। लाइन के दोहरीकरण का काम पूरा होने पर ट्रायल के लिए गुरुवार को रेलवे के सीआरएस (कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी) के नेतृत्व में तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम हरिद्वार पहुंची थी।

स्थानीय विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने घटनास्थल पर पहुंच हादसे की जानकारी ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हादसे में मरने वाले लोगों की पहचान अब तक नहीं हो पाई है।

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