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उत्तराखंडः 3 प्लांट होने के बावजूद सूबे में ऑक्सिजन का टोटा, केंद्र पर बरसा HC, उधर, एमपी में HC ने कैदियों को टेंपरेरी बेल देने को कहा

केरल सरकार ने निजी अस्पतालों पर लगाम कसते हुए वहां बेड के रेट तय कर दिए हैं। सरकार ने एनएबीएच अस्पतालों में रेट 2910 रुपये और नॉन एनएबीएच अस्पतालों में बेड का रेट 2645 रुपये तय किया है। केरल हाईकोर्ट ने सरकार की मुक्त कंठ से सराहना की है।

देश में कोविड मरीजों के बीच ऑक्सीजन की भारी मांग है। (फोटो-पीटीआई)।

उत्तराखंड के 3 प्लांटों में रोजाना 300 मीट्रिक टन से अधिक ऑक्सिजन का उत्पादन हो रहा है। लेकिन इसके बावजूद उत्तराखंड को ऑक्सिजन सप्लाई के लिए दूसरे राज्यों की ओर देखना पड़ रहा है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि ये कैसा मैनेजमेंट है। कोर्ट का कहना है कि ऑक्सिजन बनाने के बाद भी सूबे को रोजाना किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

सूबे में ऑक्सिजन की कमी का कारण यह है कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के लिए ऑक्सिजन का कोटा तय कर दिया है। ऐसे में यहां तैयार हो रही जीवनदायिनी गैस दूसरे राज्यों को जा रही है। उत्तराखंड को अन्य राज्‍यों से ऑक्सिजन लेनी पड़ रही है। इस लाने के लिए अभी कंटेनर पूरे नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के अनुपात में ऑक्सिजन की कमी नहीं है लेकिन भविष्य में यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो फिर ऑक्सिजन को लेकर स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।

एमपी हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से जेलों को खाली करने की हिदायत दी

कोरोना का कहर मध्य प्रदेश को भी परेशान करने लगा है। हालात इस कदर बेकाबू हो चले हैं कि हाईकोर्ट को तत्काल प्रभाव से जेलों को खाली करने की हिदायत सरकार की हाईपावर्ड कमेटी को देनी पड़ी है। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि बुजुर्ग, महिलाओं और बीमार कैदियों के अलावा अन्य को भी पैरोल पर रिहा करने की जरूरत है।

चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस अतुल श्रीधरन की बेंच एक याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ये हिदायत जारी की। कोर्ट ने 60 साल से ऊपर से सभी पुरुष कैदियों, 45 साल से ऊपर की सभी महिला कैदियों के अलावा गर्भवती महिला कैदियों और छोटे बच्चों के साथ जेल में बंद महिलाओं को पैरोल देने की अनुमति दी है।

जिन कैदियों की सजा सात साल तक की है उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। जेल अथॉरिटी ऐसे कैदियों से बेल एप्लीकेशन लेकर संबंधित कोर्ट में दायर करेंगी। निचली अदालतों से चार दिनों के भीतर इन आवेदनों पर फैसला करने को कहा गया है। ऐसे कैदियों को कम से कम 90 दिन की टेंपरेरी बेल दी जानी है। विचाराधीन कैदियों को भी पैरोल पर रिहा करने का आदेश है।

केरल ने निजी अस्पतालों को किया पाबंद तो कोर्ट ने की सराहना

उधर, केरल सरकार ने निजी अस्पतालों पर लगाम कसते हुए वहां बेड के रेट तय कर दिए हैं। सरकार ने एनएबीएच अस्पतालों में रेट 2910 रुपये और नॉन एनएबीएच अस्पतालों में बेड का रेट 2645 रुपये तय किया है। इसमें ऑक्सिजन, दवा व ड्रग्स, नर्सिंग-बोर्डिंग चार्जेज भी शामिल होंगे। केरल हाईकोर्ट ने सरकार की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा- हमारा बोझ हल्का हो गया। कोर्ट ने इस आदेश को फेंटास्टिक बताया है।

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