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उत्तराखंड संकट: हरीश रावत बोले- हम ‘चौड़े सीने’ वाली केंद्र सरकार से नहीं लड़ना चाहते

हरीश रावत ने केंद्र से राज्य को उसका काम करने देने का आग्रह करते हुए कहा कि यह जश्न का नहीं बल्कि राज्य के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने का समय है।

Author देहरादून | April 22, 2016 3:10 AM
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से मुखातिब होते उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत। (पीटीआई फोटो)

उत्साहित हरीश रावत ने केंद्र से सहयोगी संघवाद की भावना से काम करने की अपील करते हुए गुरुरवार (21 अप्रैल) को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘‘ताकतवर, शक्तिशाली एवं चौड़े सीने वाले’’ केंद्र से टकराव का रास्ता नहीं अपनाना चाहती। रावत ने राज्य के उच्च न्यायालय के उस फैसले का स्वागत किया जिसमें उसने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को दरकिनार करते हुए उनकी सरकार बहाल कर दी है। रावत ने कहा कि मोदी सरकार को हाल के घटनाक्रम को भूल जाना चाहिए और सहयोग करना चाहिए।

रावत ने कहा कि उनके सहयोगियों से कहा गया है कि कड़वाहट को दूर करें और राज्य को विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करें। उन्होंने यहां अपने आवास पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हम लड़ना नहीं चाहते, वे शक्तिशाली, ताकतवर और चौड़े सीने वाले हैं। हम संघर्ष की बात नहीं करते बल्कि सहयोग की बात करते हैं। मैं केंद्र से अनुरोध करूंगा कि अतीत को भुला दें और सहयोगी संघवाद की भावना से काम करें।’’

रावत ने अपनी सरकार बहाल करने के उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘उत्तराखंड को न्याय मिला है…यह उत्तराखंड के लोगों की विजय है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। पूरा देश जानता है कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता के पीछे कौन था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों की ओर से उच्च न्यायालय को धन्यवाद देना चाहूंगा।’’

रावत ने केंद्र से राज्य को उसका काम करने देने का आग्रह करते हुए कहा कि यह जश्न का नहीं बल्कि राज्य के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने का समय है। उन्होंने कहा कि विश्वास मत प्राप्त करने से ठीक पहले राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के कृत्य से उत्तराखंड पर ‘‘चार गहरे घाव’’ लगे हैं। रावत ने कहा, ‘‘जब हम राज्यपाल की अनुमति से अपना बहुमत साबित करने से कुछ ही कदम दूर थे दमनकारी उपायों से दल बदल कराया गया और केंद्र की ओर से राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘गरीब आदमी के बजट को कचरे के डिब्बे में डालने का आदेश दे दिया गया और कल्याणकारी योजनाएं ऐसे समय नियंत्रण से बाहर चली गईं जब सभी योजनाएं वित्तीय वर्ष के अंत में समायोजन के लिए कतार में थीं।’’उन्होंने कहा कि वह महत्वपूर्ण समय बीत चुका है जब बजट खर्च को गति दी जानी थी और अब ‘‘हमें पिछले दो महीनों में हुए नुकसान की भरपायी के लिए संघर्ष करना होगा।’’

रावत ने कहा, ‘‘हमारी सभी योजनाएं गड़बड़ हो गई हैं और अब हमें उन सभी को व्यवस्थित करना होगा।’’उन्होंने कहा कि पिछले दो महीने में राजनीतिक अस्थिरता के चलते राज्य को काफी नुकसान उठाना पड़ा है और उसकी विकास योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।

रावत ने कहा कि हम फिर भी केंद्र से अनुरोध करेंगे कि उत्तराखंड को उसके विकास में सहयोग करे और उनकी सरकार अतीत भुलाकर साथ आगे बढने को तैयार है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य में 27 मार्च को अनुच्छेद 356 लागू किये जाने पर तीखा प्रहार करते हुए उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के एम जोसेफ के नेतृत्व वाली एक खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू करना उच्चतम न्यायालय की ओर से निर्धारित कायदे के विपरीत है।

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