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यूपी के डिप्टी स्पीकर चुनाव में सपा बागी बनाम सपा विधायक, अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर दंगों के मुख्य आरोपी कादिर राणा का पार्टी में किया स्वागत

काफी दिनों से पार्टी से दूरी बनाए हुए नितिन अग्रवाल को इस चुनाव में भाजपा का समर्थन मिला हुआ है तो वहीं नरेंद्र सिंह वर्मा को सपा समर्थन दे रही है।

Akhilesh Yadav, CM Yogi
उत्तर प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव में सपा के बागी विधायक को भाजपा ने अपना समर्थन दिया है(फोटो सोर्स: PTI)।

उत्तर प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए होने वाले मतदान में स्थिति काफी दिलचस्प बन गई है। बता दें यह चुनाव हरदोई से समाजवादी पार्टी के बागी विधायक नितिन अग्रवाल और सीतापुर के महमूदाबाद से सपा विधायक नरेन्द्र सिंह वर्मा के बीच होगा। नितिन अग्रवाल काफी दिनों से पार्टी से दूरी बनाए हुए और उनपर आरोप लगते रहे हैं कि वो पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं। बता दें कि इस चुनाव में उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है, तो वहीं नरेंद्र सिंह वर्मा को सपा समर्थन दे रही है।

उल्लेखनीय है कि यूपी विधानसभा उपाध्यक्ष परंपरागत तौर पर मुख्य विपक्षी दल के विधायक को ही बनाया जाता रहा है। ऐसे में कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने उपाध्यक्ष को लेकर चली आ रही परम्परा को तोड़ा है। भाजपा ने अपनी तरफ से विपक्षी दल सपा के ही विधायक को उम्मीदवार बनाया और समर्थन दिया है। वहीं सपा ने रविवार को इसे “अलोकतांत्रिक” करार दिया। पार्टी ने तर्क दिया कि आमतौर पर, इस पद के लिए सबसे बड़े विपक्ष के एक विधायक निर्विरोध चुना जाता है।

वहीं नितिन अग्रवाल की बगावत को लेकर सपा प्रत्याशी नरेन्द्र सिंह वर्मा ने कहा कि, नितिन सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीते और जीतने के बाद वो पार्टी के खिलाफ काम करना शुरू कर दिये, वो भाजपा में हैं। वहीं नितिन अग्रवाल का कहना है कि, औपचारिक रूप से उनका भाजपा में शामिल होना अभी बाकी है। ऐसे में वह सपा विधायक ही हैं।

इस पद पर चुनाव के लिए रविवार को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रियों के साथ नितिन अग्रवाल ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। माना जा रहा है कि सपा से उनकी दूरी को देखते हुए भाजपा उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष बनाकर राज्य चुनाव 2022 से पहले बड़ा संदेश देना चाहती है।

कौन हैं नितिन अग्रवाल: बता दें कि नितिन अग्रवाल पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल के बेटे हैं। जोकि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये थे। तब से ही नितिन अग्रवाल पर भी भाजपा के साथ होने का आरोप लगता रहता है।

गौरतलब है कि, इस चुनाव में सपा के पास संख्या बल कम होने के बावजूद वो भाजपा को वॉकओवर देने के मूड में नहीं है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मंजूरी के बाद पार्टी ने शनिवार को नरेंद्र सिंह वर्मा को उपाध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित किया था।

विधानसभा की मौजूदा स्थिति: वर्तमान समय में विधानसभा में बीजेपी के पास 304 विधायक हैं, तो वहीं समाजवादी पार्टी के 49, बसपा के पास 16, अपना दल के 9, कांग्रेस के 7, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 4, निर्दलीय तीन, असंबद्ध सदस्य दो और राष्ट्रीय लोकदल तथा निषाद पार्टी के एक-एक विधायक हैं।

मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी कादिर राणा सपा में शामिल: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दल बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है। गौरतलब है कि बहुजन समाज पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा ने पार्टी छोड़कर रविवार को सपा का दामन थाम लिया है। वहीं पूर्व सांसद और 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी कादिर राणा भी सपा में शामिल हो गए हैं।

2009 में बसपा के टिकट से मुजफ्फरनगर से सांसद चुने गए राणा पर आपत्तिजनक बयान देने के चलते दंगा मामले में नामजद किया गया था और उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले राणा सपा में ही थे लेकिन 2007 में राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) में शामिल होने के लिए उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। 2007 के विधानसभा चुनावों में वह रालोद उम्मीदवार के रूप में मोरना निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। हालांकि 2009 लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और जीत हासिल की।

वहीं 2014 में बसपा ने उन्हें फिर से मैदान में उतारा लेकिन वह हार गए थे। राणा की सपा में वापसी पर अखिलेश यादव ने रविवार को कहा कि, राणा एक वरिष्ठ नेता हैं, और अब पार्टी के साथ वापस आ गए हैं।

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