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अयोध्या, काशी मथुरा…सब हिंदुओं को दें मुसलमान- यूपी शिया वक़्फ़ बोर्ड चेयरमैन का बयान

बोर्ड चेयरमैन दावा है कि मस्जिद बनाने के लिए तबाह किए गए सभी चर्च को दोबारा संरक्षित किया गया। उन्होंने आगे कहा, 'अब मंदिरों के लिए जमीन देने का वक्त है, जिसे मुगलों ने छीन लिया था।'

Author लखनऊ | Published on: October 22, 2019 7:35 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड चेयरमैन वसीम रिजवी ने सोमवार को कहा कि मुसलमानों को ‘पूर्वजों की गलती सुधारते हुए’ सभी विवादित स्थलों से दावा छोड़ उन्हें हिंदुओं को सौंप देना चाहिए। रिजवी के मुताबिक, सुन्नी पक्ष द्वारा विवादित ढांचों पर नमाज पढ़ने की इजाजत मांगने से जुड़ी रिपोर्ट्स सामने आने के बाद इस तरह की अपील की जरूरत पड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह के सभी मुद्दों का हल नहीं निकला तो अयोध्या मसले का हल निकलने के बावजूद इससे मिलते-जुलते विवाद सामने आते रहेंगे।

रिजवी ने यह अपील एक वीडियो के माध्यम से की, जो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है। अपनी अपील में रिजवी ने दावा किया कि देश भर में इस तरह के 11 प्रमुख विवादित स्थल हैं। इनमें मथुरा, वाराणसी और जौनपुर आदि शहरों में भी ये विवादित स्थल हैं। रिजवी का दावा है कि मस्जिद बनाने के लिए तबाह किए गए सभी चर्च को दोबारा संरक्षित किया गया। उन्होंने आगे कहा, ‘अब मंदिरों के लिए जमीन देने का वक्त है, जिसे मुगलों ने छीन लिया था।’ रिजवी ने आगे कहा, ‘मंदिरों की जगह बनाई गई मस्जिदों को हिंदुओं को सौंप दिया जाना चाहिए। हमें अपने पूर्वजों की गलतियां सुधारनी चाहिए और देश में शांति स्थापित करना चाहिए।’

सोमवार को द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रिजवी ने कहा, ‘इस अपील की जरूरत इसलिए पड़ी है क्योंकि सुन्नियों ने उन विवादित स्थलों पर नमाज पढ़ने की इजाजत मांगी है जहां अब मस्जिद हैं…हालांकि यह किसी तरह का हल नहीं है। राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद का हल ढूंढना पूरी तरह समस्या का इलाज नहीं है क्योंकि ऐसे ही दूसरे मुद्दे खड़े हो सकते हैं। 11 बड़े शहरों में मंदिरों को तबाह करके कथित तौर पर मस्जिदों का निर्माण किया गया है। विवादित स्थलों पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है, इसलिए मैं इस्लाम के सभी अनुयायियों से अपील करता हूं कि ये विवादित स्थल हिंदुओ को सौंप दिए जाएं ताकि पूर्वजों की गलती को सुधारा जा सके।’

बता दें कि रिजवी चार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से दो रामपुर जबकि जबकि एक-एक मामला लखनऊ और प्रयागराज का है। उन पर वक्फ संपत्ति के गलत इस्तेमाल और गैरकानूनी ट्रांसफर के आरोप हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने वक्फ संपत्तियों से जुड़ी अनियमितताओं और वक्फ की जमीनों के गलत इस्तेमाल के आरोपों की जांच के लिए शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड और उनके चेयरमैनों के खिलाफ सीबीआई जांच की केंद्र सरकार से सिफारिश की है।

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