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आजम खान: महाकुंभ कराने वाले पहले मुस्लिम मंत्री, यूनिवर्सिटी में कराया था ‘जश्न-ए-जौहर’, सैफई महोत्सव से भी बड़ा था बजट

अखिलेश सरकार ने 2013 में आजम खान को महाकुंभ मेला समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। हालांकि, जब इलाहबाद रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मची और उसमें 40 लोगों की जान चली गई तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए आजम खान ने तुरंत 11 फरवरी 2013 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

आजम खान का नाता जनता पार्टी, जनता दल, लोकदल से भी रहा लेकिन जब से वो मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए, उन्हीं के होकर रह गए। आजम खान 1985 में मुलायम सिंह के संपर्क में आए थे।

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और रामपुर से सांसद आजम खान को भूमाफिया घोषित किया है। उन पर अपने दादा के नाम पर अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में 26 किसानों की 5 हजार हेक्टेयर जमीन हड़पने के आरोप हैं। आजम खान सपा के मुस्लिम चेहरे हैं और मीठी जुबां से तीखी बात करने वाले नेताओं में शुमार हैं। वो अक्सर अपने विवादित बयानों से चर्चा में रहते हैं। पिछले सात दिनों में उन पर 26 FIR हुए हैं।

खान रामपुर से नौ बार विधान सभा चुनाव जीत चुके हैं और पहली बार रामपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। 71 साल के आजम खान ऐसे पहले मुस्लिम मंत्री रहे हैं जिन्हें महाकुंभ के सफल संचालन का श्रेय हासिल है। एक टीवी इंटरव्यू में आजम खान ने खुद कहा था कि उन्होंने सफल महाकुंभ का आयोजन कराया और करीब 2.5 से 3 करोड़ लोगों को न सिर्फ संगम में साफ पानी मुहैया करवाया बल्कि उन्हें सुरक्षित तरीके से घर वापस भी भेजा।

अखिलेश सरकार ने 2013 में आजम खान को महाकुंभ मेला समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था। हालांकि, जब इलाहबाद रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मची और उसमें 40 लोगों की जान चली गई तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए आजम खान ने तुरंत 11 फरवरी 2013 को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। जांच में जब पता चला कि हादसा कुंभ मेला क्षेत्र से बाहर हुई तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने न केवल उनका इस्तीफा खारिज कर दिया बल्कि उनके कामकाज की तारीफ भी की।

आजम खान का नाता जनता पार्टी, जनता दल, लोकदल से भी रहा लेकिन जब से वो मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए, उन्हीं के होकर रह गए। आजम खान 1985 में मुलायम सिंह के संपर्क में आए थे। जब 1992 में मुलायम सिंह यादव ने सपा की स्थापना की तब आजम खान उनके संस्थापकों में शामिल थे। हालांकि, एक वक्त ऐसा भी आया जब अमर सिंह और जयाप्रदा की वजह से आजम खान मुलायम सिंह यादव से दूर हो गए। खान ने साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मुलायम से बगावत कर दी। सपा ने भी उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया लेकिन साल भर में ही वो फिर से सपा में लौट आए।

आजम खान के मुताबिक अली जौहर यूनिवर्सिटी में 80 फीसदी पैसा हिन्दू दोस्तों ने दिया है। उन्होंने कहा कि रामपुर में यूनिवर्सिटी के अलावा सीबीएसई बोर्ड के दो स्कूल भी स्थापित किए हैं। एक लड़कों के लिए और दूसरा लड़कियो के लिए। आजम खान 32 साल की उम्र में पहली बार 1980 में रामपुर से विधायक चुने गए थे। 1989 में वो 41 साल की उम्र में यूपी सरकार में मंत्री बनाए गए। 1980 से लगातार 2019 तक वो रामपुर के विधायक रहे। बीच में 26 नवंबर 1996 से 09 मार्च 2002 तक वो राज्यसभा सदस्य रहे।

रामपुर की पहचान बन चुके आजम खान ने अखिलेश सरकार में सैफई महोत्सव की तर्ज पर रामपुर महोत्सव का आयोजन किया था। उस वक्त भी एक विवाद उछला था, जब खान ने रामपुर महोत्सव का नाम बदलकर जश्न-ए-जौहर कर दिया था और समारोह का स्थान अपनी निजी यूनिवर्सिटी में रखा था। उस समारोह का पूरा इंतजाम जिला प्रशासन ने किया था। राज्य सरकार की तरफ से इसके लिए 58 लाख रुपये आवंटित किए गए थे जो सैफई महोत्सव से 10 लाख ज्यादा थे। तब आरोप लगे थे कि अखिलेश सरकार आजम खान के सामने नतमस्तक है।

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