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चुनाव से पहले पूर्व नौकरशाहों का ओपन लेटर, लगाया आरोप- यूपी में शासन पूरी तरह से फेल

पत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाते हुए, केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के मामले का उल्लेख किया गया है।

देश के अन्य राज्यों में भी आज यानी 2 अगस्त से छात्रों की ऑफलाइन कक्षाएं शुरू की गई हैं।

74 पूर्व नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के एक समूह ने एक ओपन लेटर लिखा है जिसमें उत्तर प्रदेश में शासन व्यवस्था के ”चरमराने” और कानून के शासन के खुले तौर पर ”उल्लंघन” का आरोप लगाया गया है। इस पत्र का 200 से अधिक प्रतिष्ठित नागरिकों ने समर्थन किया है। चार पन्नों के पत्र में, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर मनमाने ढंग से हिरासत, यातना और पुलिस हमलों का आरोप लगाया है।

साथ ही मांग की गई है कि अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं को रोका जाए, गोहत्या और “लव जिहाद” के खिलाफ कानून के नाम पर मुस्लिम पुरुषों को निशाना न बनाया जाए और विरोध करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का दुरुपयोग न किया जाए। राज्य में कोरोना से हुई मौतों और बदहाल स्वास्थ्य प्रणाली की ओर इशारा करते हुए पत्र में यह भी मांग की गई है कि राज्य में कोविड संकट को ठीक से संभाला जाए। पत्र में कहा गया है, “यूपी में वर्तमान सत्तारूढ़ शासन ने शासन के एक ऐसे मॉडल की शुरुआत की है जो संविधान के मूल्यों और कानून के शासन से हर गुजरते दिन आगे और दूर होता जाता है।”

पत्र में कहा गया है, “यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट और पुलिस सहित प्रशासन की सभी शाखाएं ध्वस्त हो गई हैं। हमें डर है कि, यदि अभी जांच नहीं की गई, तो राज्य में राज्य की राजनीति और संस्थानों को नुकसान होगा, जिसके परिणामस्वरूप लोकतंत्र का क्षय और विनाश होगा। ”

पत्र में डेटा और उदाहरण दिए गए हैं। पत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाते हुए, केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के मामले का उल्लेख किया गया है। मालूम हो कि सिद्दीकी कप्पन को यूपी में एक दलित महिला के सामूहिक बलात्कार पर रिपोर्ट करने के लिए हाथरस जाने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने जल्दबाजी में रात में ही पीड़िता का दाह संस्कार कर दिया था। इस घटना ने देश भर में लोगों में गुस्सा पैदा किया था।

पत्र में कहा गया है, “कप्पन ने अब तक 200 से अधिक दिन जेल में बिताए हैं। हाल ही में, इन दमनकारी नीतियों ने यूपी की स्वास्थ्य प्रणाली में कमियों को उजागर करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का रूप ले लिया है।”

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