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यूपी में यूं ही नहीं पास हो गया ‘लव जिहाद’ कानून, गवर्नर बोलीं- ज्यादातर लड़कियां थीं परेशान

राज्यपाल ने कहा, "जब एक सर्वे में ऐसी घटनाओं की खबरें बढ़ जाती हैं, तो इस स्थिति में एक विधेयक लाया जाना और उसे लागू करना जरूरी है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र लखनऊ | Updated: January 7, 2021 9:21 AM
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।

उत्तर प्रदेश में हाल ही में शादी-निकाह के बाद धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने कानून बनाया था। राज्य में अब इस कानून के गलत इस्तेमाल की खबरें भी तेजी से सामने आने लगी हैं। इसके अलावा महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के कई मामलें भी उभरे हैं। यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य में अपने कार्यकाल के डेढ़ साल पूरे होने पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात की।

महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे जुर्म पर उन्होंने कहा कि हमारे समाज, परिवार और निजी स्तर पर कई बुराइयां मौजूद हैं। जब यह बुराइयां बाहर आती हैं, तो इस तरह की घटनाएं घटती हैं। फिर हमें लगता है कि उन्हें न्याय मिल गया, ठीक कार्यवाही हो गई। पर मुझे लगता है कि यह परिवार की जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चों को संभालें। घर पर यह सावधानी से देखा जाना चाहिए कि बेटे और बेटियां बाहर क्या कर रहे हैं। नजर रखनी चाहिए कि क्या कोई प्रतिकूल घटना घट सकती है।

शादी या निकाह के बाद धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए बने धर्म-परिवर्तन रोकथाम कानून पर राज्यपाल ने कहा कि अगर कभी कोई कानून लाया जाता है, तो यह यूं ही नहीं होता। एक सर्वे हुआ है, जिसमें देखा गया कि कितनी लड़कियों की शादी हुई और कितनों को परेशानी झेलनी पड़ी, कितनी लड़कियां वापस लौटीं और कितनी लड़कियों ने शिकायत दर्ज कराई। यहां तक कि माता-पिता भी गिरफ्तारी की मांग के साथ आगे आते हैं और आरोप लगाते हैं कि लड़के ने नाम बदला था।

राज्यपाल ने कहा, “जब एक सर्वे में ऐसी घटनाओं की खबरें बढ़ जाती हैं, तो इस स्थिति में एक विधेयक लाया जाना और उसे लागू करना जरूरी है। महिलाएं मेरे पास अलग-अलग मुद्दे लेकर आती हैं और अगर जरूरत पड़ती है, तो मैं उन्हें सरकार के पास भेजती हूं। पर इस बारे में ज्यादा शिकायत नहीं हैं।”

समझदार किसान आंदोलन का हिस्सा नहीं: दिल्ली में जारी किसान आंदोलन को लेकर किए गए सवाल पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जो भी किसान समझदार हैं, वे इसमें शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सिर्फ पंजाब के किसान ही प्रदर्शन में शामिल हैं। जब विधेयक लाया जाता है, तो कोई चर्चा नहीं करता कि उन्हें किस बात पर समस्या है। सिर्फ इसे वापस लेने की मांग हो रही है। सभी को दिमाग से सोचना चाहिए।

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