देश में यातायात नियमों के उल्लंघन के मामले तेजी से बढ़े हैं। आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मामलों की संख्या हर साल औसतन सवा से डेढ़ करोड़ बढ़ रही है। केवल इस साल आंकड़े देखें तो उत्तर प्रदेश वालों ने दिल्ली वालों से ज्यादा नियमों को तोड़ा है।
वर्ष 2024 में बीते साल की तुलना में इन उल्लंघन के मामले 1.39 करोड़ मामले बढ़े थे, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.59 करोड़ करोड़ से अधिक हो गया है। आठ फरवरी 2025 तक देश में कुल 10331950 चालान हुए।
सड़कों पर मौजूद यातायात कर्मियों और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बीच उल्लंघन के बढ़ते ये आंकड़े बेहद ही चिंताजनक हैं। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की एक रपट में ये तथ्य सामने आए हैं। रपट बताती है कि देश में आठ फरवरी 2026 तक यातायात नियम तोड़ने के मामले में सबसे आगे उत्तर प्रदेश के लोग हैं।
जानिए किस राज्य में कितने मामले?
मंत्रालय के पास उत्तर प्रदेश के 21,31,038 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि दूसरे नंबर पर दिल्ली में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए। यहां फरवरी तक मंत्रालय के पास 1024464 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश 1,84,158 मामले, हरियाणा 4,29,086, केरल 10,08,724, मध्य प्रदेश 3,00,748 और पश्चिम बंगाल में 3.53,519 मामले दर्ज किए गए हैं।
इस रपट में सभी केंद्र शासित प्रदेशों व राज्यों के यातायात उल्लंघन के मामले दर्शाए गए हैं, जहां पर ई-चालान की व्यवस्था लागू है।

मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि लक्षद्वीप और तेलंगाना में इस व्यवस्था को लागू नहीं किया गया है। जिन धाराओं में वाहन चालकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। उसमें मोटर यान अधिनियम 1988 शामिल हैं।
इसके तहत चालान और जुर्माना दोनों ही प्रावधान लागू होते हैं। तय प्रावधान के मुताबिक, यातायात नियम के तहत गति सीमा, सीट बेल्ट न लगाना, हेल्मेट न लगाने, यातायात नियम उल्लंघन, मोटन वाहनों के बीमा प्रावधान उल्लंघन और परमिट उल्लंघन शामिल होते हैं।
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