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कैग ऑडिट पर उत्तर प्रदेश में राज्यपाल व मुख्यमंत्री आमने-सामने, राम नाईक ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

पत्र में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे तीन पत्रों का उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने सीएम से जीडीए का ऑडिट कराने की अनुमति देने के लिए कहा था।

Author नई दिल्ली | September 10, 2016 12:54 PM
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक। (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर राज्य सरकार और राजभवन आमने-सामने हैं। इस बार मामला गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) ऑडिट से इनकार का है। यूपी सरकार के जीडीए का कैग ऑडिट कराने से इन्कार के बाद राज्यपाल राम नाईक ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। बता दें कि पहले भी कानून-व्यवस्था और लोकायुक्त को लेकर राज्यपाल और राज्य सरकार की तल्खी कई बार सामने आ चुकी है। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने जीडीए के ऑडिट की अनुमति नहीं दी तो राज्यपाल ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया। गुरुवार (8 सितंबर) को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र में नाईक ने लिखा है कि वे उनसे व्यक्तिगत तौर मिलकर सारा मामला उनके सामने रखना चाहते हैं क्योंकि इस मुद्दे में कई संवैधानिक निहितार्थ हैं।

इससे पहले भी राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सरकारी तंत्र द्वारा जमीनों के अतिक्रमण और उनकी वर्तमान मार्केट वैल्यू की जानकारी मांगी थी। सूत्रों ने बताया कि नाइक ने 26 अगस्त को राष्ट्रपति को पत्र लिखा था। पत्र में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को लिखे तीन पत्रों का उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने सीएम से जीडीए का ऑडिट कराने की अनुमति देने के लिए कहा था। लेकिन मुख्यमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा 25 जुलाई को लिखे एक और पत्र में राज्यपाल ने अवगत कराया था कि राज्य की संचित निधि का कैग से ऑडिट कराने का संवैधानिक प्रावधान है।

बता दें कि प्राधिकरण को इसी निधि से फंड मिलता है। जिसमें दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी शामिल होती है और इसे राज्य सरकार मूलभूत परियोजनाओं, क्षेत्र के विकास और सड़कों पर खर्च करती हैं। राज्यपाल का मानना है कि कैग द्वारा इसका ऑडिट कराना नियमानुसार है। दूसरी तरफ राज्य सरकार लगातार कैग ऑडिट से इनकार करती रही है। उसका तर्क है दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी राय की संचित निधि में नहीं आती है। नाईक ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि उन्होंने ऑडिट को लेकर मुख्यमंत्री को प्रासंगिक प्रावधानों से अवगत से कराया था, लेकिन सीएम ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। पूरे मामले पर राज्यपाल राम नाइक ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मार्गदर्शन मांगा है।

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