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यूपी के मुख्य सचिव ने ज़्यादा कोरोना टेस्ट करने वाले डीएम को हड़काया? पूर्व आईएएस ने किया ट्वीट तो हुई एफ़आईआर

ट्वीट को लेकर सूर्य प्रताप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में गुरुवार को एफआईआर दर्ज करायी गई है। यह एफआईआर सचिवालय चौकी प्रभारी संतोष कुमार की तहरीर पर लिखी गई है।

CM, Corona Virus,उत्तर प्रदेश में अस्पतालों की निरीक्षण करते सीएम योगी आदित्यनाथ।(फाइल फोटो-PTI)

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव पर एक पूर्व आईएएस अधिकारी ने ज्यादा कोरोना जांच करने को लेकर हड़काने का आरोप लगाया है। पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने ट्वीट कर लिखा था कि, सीएम योगी की टीम- 11 की मीटिंग के बाद क्या मुख्यसचिव ने ज्यादा कोरोना टेस्ट कराने वाले कुछ डीएम को हड़काया कि क्यों इतना तेजी पकड़े हो क्या ईनाम पाना है, जो टेस्टस टेस्ट चिल्ला रहे हो , क्या यूपी के मुख्य सचिव स्थिति स्पष्ट करेंगे? यूपी की स्ट्रेटजी, नो टेस्ट नो कोरोना।

इस ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ हजरतगंज कोतवाली में गुरुवार को एफआईआर दर्ज करायी गई है। यह एफआईआर सचिवालय चौकी प्रभारी संतोष कुमार की तहरीर पर लिखी गई है। इंस्पेक्टर हजरतगंज अंजनी कुमार पाण्डेय ने बताया कि महामारी अधिनियम व दुष्प्रचार करने की धारा में एफआईआर दर्ज की गई है।

एफआईआर के बाद  सूर्य प्रताप सिंह ने दनादन कई ट्वीट किए हैं। सूर्य प्रताप सिंह ने ट्वीट में सरकार की आलोचना की है।उन्होंने लिखा है, मीडिया के सूत्रों से अपुष्ट खबर आ रही है कि टीम-11 पर किए मेरे के ट्वीट पर सरकार ने मेरे ऊपर मुक़दमा कर दिया है। सबसे पहले तो मैं ये साफ कर देना चाहता हूँ कि उत्तरप्रदेश सरकार की पॉलिसी पर दिए ‘No Test, No Corona’ वाले बयान पर मैं अडिग हूँ, और सरकार से निरंतर सवाल पूछता रहूँगा। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है,  दूसरी बात ये कि मुख्य सचिव की कही बात जो मैंने Quote की उस पर मैंने @IASassociationऔर @ChiefSecyUP का जवाब माँगा था, जब कोई जवाब नहीं आया तो मैंने उसे मौन सहमति मान ली। अगर जवाब देने की जगह सरकार मुक़दमा करने की प्रथा आगे बढ़ाना चाहती है तो मैंने तैयार हूँ, आइए गिरफ़्तार करिए।

मैंने IAS अधिकारी रहते पिछली सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया, तब भाजपा के बड़े बड़े नेता मेरी पीठ थपथपाते थकते नहीं थे। पूर्व CM @yadavakhilesh ने कभी मेरे आंदोलन को निजी तौर पर नहीं लिया। पर आज ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ की बात करने वाली सरकार का रवैया देख आश्चर्यचकित हूँ, स्तब्ध हूँ। मैं @myogiadityanath जी और @Uppoliceसे कहना चाहता हूँ कि मुझ पर किए गए मुकदमे की कॉपी मुझतक पहुँचाने का कष्ट करें। मैं इस पूरे प्रकरण पर प्रेस कांफ्रेंस कर सभी मुद्दों पर जवाब दूँगा और सरकार से मेरे कुछ सवाल हैं उन्हें जनता के समक्ष रखूँगा। सत्य पक्ष सत्ता पक्ष पर भारी पड़ेगा।

सूर्य प्रताप सिंह ने जनसत्ता.कॉम से कहा कि उनके पास इस बात की पुख़्ता सूचना है कि सरकार की ओर से जिलाधिकारियों को अधिक कोरोना जाँच करने के प्रति हतोत्साहित किया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर ही उन्होंने चीफ़ सेक्रेटरी से ट्वीट के ज़रिए सवाल पूछा था। सवाल पूछना अपराध कैसे हो गया? अगर यह अपराध है तो मुझे गिरफ़्तार किया जाए। मैं अपना पक्ष अदालत में साबित करने के लिए तैयार हूँ। सूर्य प्रताप सिंह ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश में देश की 20 फ़ीसदी आबादी रहती है, लेकिन यहाँ कोरोना-मरीज़ों की संख्या तीन प्रतिशत ही है।

इस मामले के सामने आने के बाद विपक्ष ने योगी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। सपा प्रवक्ता आईपी सिंह ने ट्वीट करते हुए लिखा है,पूर्व वरिष्ठ IAS अफसर@suryapsinghias जी पर योगी सरकार ने कोरोना पर पूछे उनके सवाल पर मुक़दमा कर दिया है। तानाशाही की सारी हदें पार करने वाली योगी सरकार और उनके अधिकारियों से कोई डरने वाला नहीं है। सच हम बोलेंगे और आपको वो सच सुनना पड़ेगा। जय हिंद, जय समाजवाद।

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