ताज़ा खबर
 

…तो संजय गांधी के नक्शे कदम पर चल रहीं प्रियंका? यूपी में बेस बनाकर दोहराना चाह रही 1980 की कामयाबी की कहानी

अगर प्रियंका लखनऊ शिफ्ट होती हैं तो उन्हें अपने चाचा संजय के नक्शे कदम पर चलकर 1980 की तरह यूपी में अपना बेस बनाना चाहिए। लेकिन देश में जो मौजूदा राजनीतिक माहौल है, उसे देखते हुए यह उनके और पार्टी के लिए लगभग असंभव कार्य की तरह लगता है।

COVID-19, CONGRESSकांग्रेसी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में दो साल से भी कम का वक़्त बचा है। ऐसे में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी में कांग्रेस की वापसी के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही हैं। प्रियंका यूपी में अपना राजनीतिक बेस कैंप बनाएंगी और अपने चाचा संजय गांधी के नक्शे कदम पर चलकर 1980 की तरह यूपी में कामयाबी की कहानी दोहराना चाहती हैं। दरअसल मीडिया रेपोर्ट्स के मुताबिक प्रियंका को केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से उनका सरकारी बंगला खाली करने के लिए कहा गया है। ऐसे में प्रियंका हमेशा के लिए लखनऊ शिफ्ट हो सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रियंका जल्द ही लखनऊ के हजरतगंज में गोखले मार्ग स्थित घर में रहने आएंगी। यह घर इंदिरा गांधी की मामी शीला कौल का है। यहां रहकर प्रियंका आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी करेंगी। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पुनर्निर्माण के लिए वाड्रा को यूपी में बेस बनाने के लिए प्रेरित करते हुए तमिलनाडु से सांसद कार्ति चिदंबरम ने एक ट्वीट भी किया है। कीर्ति ने लिखा “कांग्रेस के राष्ट्रीय पुनरुद्धार का मार्ग उत्तर प्रदेश से होकर जाता है। ऐसे में पार्टी को अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी में कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना चाहिए। प्रियंका को यूपी में बेस बनाकर पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए।”

कार्ति के ट्वीट ने कांग्रेस के खेमे से दो तरह की प्रतिक्रियाएं पैदा की। कुछ लोगों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे कार्ति के पिता पी चिदंबरम ने 2014 में मैदान छोड़ दिया था। दूसरों ने याद दिलाया कि अगर वह यूपी में कांग्रेस के पुनर्निर्माण को लेकर गंभीर हैं तो प्रियंका को अपने चाचा संजय गांधी के नक्शे कदम पर चल कर कामयाबी हासिल करनी पड़ेगी।

ऐसा करने के लिए वाड्रा को लखनऊ में शिफ्ट होना पड़ेगा और यहां रहकर पार्टी के लिए काम करना होगा। 1980 में यूपी में कांग्रेस के लिए आखिरी सफल लड़ाई का नेतृत्व संजय गांधी ने किया था। 1980 में लोकसभा की सफलता के बाद हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने विजयी हासिल की थी। नव-निर्वाचित कांग्रेस विधायकों ने संजय को सीएलपी नेता के रूप में चुना था, लेकिन गांधी ने वीपी सिंह को मुख्य मंत्री बनाया था। अपनी माँ इन्दिरा गांधी की मदद के लिए दिल्ली लौटने के चौदह दिनों बाद, एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 LAC पर भारत-चीन के टकराव के बीच लद्दाख पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 11 हजार फीट पर सैन्यकर्मियों से की बातचीत
2 ‘टाइगर तो सर्कस में भी जिंदा रहता है, पर संघियों के सामने नहीं नाचता!’ टाइगर जिंदा है कहने पर सिंधिया पर बरसे ट्रोल्स
3 तीन दिनों में 26 घंटों से ज्यादा हुई अहमद पटेल से पूछताछ, ईडी ने दागे 128 सवाल
ये पढ़ा क्या?
X