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यूपी में BJP-BSP को झटका, पूर्व सांसद, एमएलसी समेत हजारों कार्यकर्ता सपा में शामिल, इस सियासी समीकरण पर है अखिलेश की नजर

इससे पहले भी पूर्वांचल के बाहुबली नेता रमाकांत यादव भी अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए थे। पूर्व दस्यु सुंदरी फूलन देवी की बहन रुक्मणी निषाद भी सपा में शामिल हो चुकी हैं।

uttar pradeshबसपा नेताओं को पार्टी में शामिल कराते अखिलेश यादव। (इमेज सोर्स- ट्विटर)

उत्तर प्रदेश में भाजपा और बसपा को बड़ा झटका लगा है। दरअसल दोनों पार्टियों के कई वरिष्ठ नेताओं, जिनमें पूर्व सांसद, विधायक भी शामिल हैं, हजारों कार्यकर्ताओं समेत सपा में शामिल हो गए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर ये दावा किया है। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने सपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए नेताओं की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की हैं।

अखिलेश यादव ने ट्वीट में लिखा कि ‘आज बसपा, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व सांसदों, विधायकों व हजारों कार्यकर्ताओं ने सपा में शामिल होकर समाजवादी आंदोलन को सशक्त किया है। सभी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन!’

सपा में शामिल होने वाले नेताओं में बसपा के संस्थापक कांशीराम के बेहद करीबी रहे पूर्व सांसद बलिहारी बाबू, पूर्व विधान परिषद सदस्य व लोकसभा चुनाव लड़ चुके तिलक चंद अहिरवार व फेरन अहिरवार के साथ ही अनिल अहिरवार भी सपा में शामिल हुए। बसपा कॉर्डिनेटर रहे तिलक चंद अहिरवार ने कहा कि बसपा की गलत नीतियों व अपमान के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

इससे पहले भी पूर्वांचल के बाहुबली नेता रमाकांत यादव भी अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए थे। पूर्व दस्यु सुंदरी फूलन देवी की बहन रुक्मणी निषाद भी सपा में शामिल हो चुकी हैं।

नए सियासी समीकरण पर अखिलेश यादव की नजरः अखिलेश यादव ने पिछला लोकसभा चुनाव बसपा के साथ गठबंधन कर लड़ा था। हालांकि इस गठबंधन का अखिलेश को फायदा नहीं मिला और पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। वहीं बसपा को इस गठबंधन का फायदा मिला और उनकी पार्टी 10 सीटें जीतने में सफल रही। हालांकि चुनाव नतीजों के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा पर हार का ठीकरा फोड़ा और सपा कार्यकर्ताओं पर बसपा का साथ ना देने का आरोप लगाया। इसके बावजूद अखिलेश ने मायावती के खिलाफ कुछ नहीं कहा।

इसके साथ ही अखिलेश यादव ने बसपा की विचारधारा के प्रति सम्मान भी दिखाया। सपा के वरिष्ठ नेता इसे लेकर अखिलेश की तारीफ भी कर चुके हैं। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि अखिलेश यादव राज्य में नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। दरअसल अखिलेश यादव की नजर दलित-पिछड़ों के समीकरण है। इसके तहत बसपा के कई नेता सपा का दामन थाम रहे हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती राजनैतिक रुप से उतनी सक्रियता नहीं दिखा रही हैं। ऐसे में अखिलेश यादव बसपा के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिशों में जुटे हैं। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद के अपनी नई पार्टी बनाने से भी बसपा को नुकसान होने की आशंका है।

नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य में सपा की सरकार बनने पर वह जातिगत जनगणना करवाएंगे। अखिलेश यादव ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में सपा के 350 सीटें जीतने का दावा किया। महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दे पर अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधा।

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