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उप्र में आठ मंत्री बर्खास्त, अखिलेश ने नौ अन्य के विभाग छीने

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर नजर रखते हुए छवि दुरुस्त करने की कवायद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आठ मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया....

Author लखनऊ | October 30, 2015 12:48 AM
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। (पीटीआई फाइल फोटो)

पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार कुछ मंत्रियों के काम न करने की मिल रही शिकायतों के बाद प्रदेश की समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को आठ मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया है। जबकि रघुराज प्रताप सिंह समेत नौ मंत्रियों के विभाग छीन लिए गए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव कई मर्तबा इन मंत्रियों की कार्यप्रणाली के प्रति अपनी नाराजगी का इजहार कर चुके थे। जिन मंत्रियों के खिलाफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कार्रवाई की है उनमें से ज्यादातर का शुमार पार्टी अध्यक्ष के करीबियों में होता रहा है।

बुधवार की शाम राज्यपाल राम नाईक के साथ मुख्यमंत्री की गोपनीय मुलाकात के चंद घंटों के भीतर राज्यपाल ने मंत्रियों को बर्खास्त करने और उनके विभाग छीनने के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी। राज्यपाल की तरफ से मंजूरी मिलने के बाद स्टांप और न्यायशुल्क पंजीयन व नागरिक सुरक्षा मंत्री राजा महेंद्र अरिदमन सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण व विकलांग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी, वस्त्र उद्योग एवं रेशम उद्योग मंत्री शिव कुमार बेरिया, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री नारद राय, प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा, प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री आलोक कुमार शाक्य, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम एवं निर्यात प्रोत्साहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भगवत शरण गंगवार को बर्खास्त कर दिया गया। राज्यपाल ने बर्खास्त किए गए सभी मंत्रियों के कार्य अतिरिक्त कार्य प्रभार के रूप में मुख्यमंत्री को दे दिए हैं।

मुख्यमंत्री की संस्तुति पर इन मंत्रियों के अलावा नौ मंत्रियों के विभाग छीन लिए गए हैं। इनमें नेताजी और अखिलेश यादव के बेहद करीबी अहमद हसन शामिल हैं। उनके पास चिकित्सा व स्वास्थ्य परिवार कल्याण मातृ व शिशु कल्याण का काम था। उत्तर प्रदेश में खस्ताहाल पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने की तमाम कोशिशों के बावजूद मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर हसन खरे नहीं उतर रहे थे। उनसे विभाग लेने की वजह भी यही बताई जा रही है। उनके अलावा समाज कल्याण अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण व सैनिक कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद, उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पारस नाथ यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी, परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, होमगार्ड एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह, मत्स्य एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्री इकलाब महमूद और माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली के विभाग छीन लिए गए। इन सभी मंत्रियों के विभाग का अतिरिक्त प्रभार राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को सौंपा है। इनमें पारसनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद यादव, रघुराज प्रताप सिंह और अहमद हसन को पार्टी आलाकमान का वरदहस्त मिला हुआ था।

उत्तर प्रदेश में सवा साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए 17 मंत्रियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को बेहद अहम माना जा रहा है। सपा के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि इन मंत्रियों को हटाकर नेताजी ने अखिलेश यादव को मंत्रिमंडल में ऐसे मंत्रियों को तैनात करने की जिम्मेदारी सौंपी है जो सिर्फ मुख्यमंत्री की पसंद के हों। ऐसा करने की कई वजहें हैं जिसमें सबसे अहम कारण विधानसभा चुनाव के पहले अखिलेश की पसंद का मंत्रिमंडल बनाना शामिल है। कई मर्तबा अखिलेश यादव भी अपने मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों के खिलाफ सार्वजनिक मंच से नाराजगी का इजहार कर चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने 31 अक्तूबर को होने वाले विस्तार में कई युवा और नए चेहरों को जिम्मेदारी देने का मन बनाया है। साथ ही मौजूदा समय में मंत्रिमंडल में शामिल कई राज्यमंत्रियों को प्रोन्नत करने की भी उनकी मंशा है।

जो हुए बर्खास्त:
स्टांप और न्यायशुल्क पंजीयन व नागरिक सुरक्षा मंत्री राजा महेंद्र अरिदमन सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी, वस्त्र उद्योग व रेशम उद्योग मंत्री शिव कुमार बेरिया, खादी व ग्रामोद्योग मंत्री नारद राय, प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा, प्राविधिक शिक्षा राज्यमंत्री आलोक कुमार शाक्य, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री योगेश प्रताप सिंह और सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम व निर्यात प्रोत्साहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भगवत शरण गंगवार।

जिनसे छीना पद:
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण मातृ एवं शिशु कल्याण मंत्री अहमद हसन, समाज कल्याण अनुसूचित जाति व जनजाति कल्याण व सैनिक कल्याण मंत्री अवधेश प्रसाद, उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पारस नाथ यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी, परिवहन मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, होमगार्ड एवं प्रांतीय रक्षक दल मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी, खाद्य व रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह, मत्स्य व सार्वजनिक उद्यम मंत्री इकलाब महमूद और माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली।

अब कल पर नजर:
उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद में अधिकतम 60 मंत्रियों की गुंजाइश है। ताजा घटनाक्रम के बाद कैबिनेट में रिक्त पदों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। कल होने वाले मंत्रिपरिषदीय फेरबदल में कुछ नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।

क्यों बख्शे गए गायत्री प्रजापति?
फेरबदल में गायत्री प्रजापति को क्यों नहीं हटाया गया। सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले मंत्री आजम खां को क्यों नहीं हटाया गया। दोनों को संरक्षण क्यों? गायत्री प्रजापति से कौन सा मोह है? मुलायम-अखिलेश अवैध खनन गतिविधियों, भ्रष्टाचार में लिप्त प्रजापति को संरक्षण दे रहे हैं।.. (लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष)

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