पार्किंसन के इलाज में संगीत का इस्तेमाल

जब आप अपना पसंदीदा गाना सुन रहे होते हैं, तो शायद आपको यह अहसास नहीं होता, लेकिन संगीत मानव मस्तिष्क पर जोरदार असर डालता है।

जब आप अपना पसंदीदा गाना सुन रहे होते हैं, तो शायद आपको यह अहसास नहीं होता, लेकिन संगीत मानव मस्तिष्क पर जोरदार असर डालता है। गायन, वाद्य यंत्र बजाने या संगीत सुनने से मस्तिष्क के वे विभिन्न हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं, जो बोलने, चलने-फिरने, याद करने और भावनाओं को नियंत्रित करने में मददगार होते हैं। अनुसंधान से यह भी पता चला है कि संगीत केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के एक अहम घटक ‘ब्रेन मैटर’ को बढ़ा सकता है जिससे मस्तिष्क को खुद मरम्मत करने में मदद मिल सकती है।

ब्रिटेन के बाइटन विश्वविद्यालय में ‘न्यूरोलाजिक म्यूजिक थेरेपी’ पर शोध कर रही रेबेका एटकिन्सन के मुताबिक, संगीत का असर उन मामलों में भी हो सकता है, जहां मस्तिष्क उस तरह काम न कर रहा हो, जैसा उसे करना चाहिए। अल्जाइमर से पीड़ित लोगों के लिए संगीत ऐसी प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है, जिससे मरीजों को उन बातों को याद करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें वह भूल चुके हों। ऐसे भी सबूत है कि जिन मरीजों के मस्तिष्क ने काम करना बंद कर दिया था और जिनकी बोलने की क्षमता चली गयी थी, वे भी संगीत के बजने पर गाना गा सकते हैं।

मस्तिष्क पर संगीत के जोरदार असर पर विचार करते हुए अनुसंधानकर्ता यह जांच कर रहे हैं कि क्या इसका इस्तेमाल विभिन्न तंत्रिका संबंधी बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है जैसे कि आघात, पार्किंसन या सिर पर लगी चोट के कारण मस्तिष्क का ठीक तरीके से काम न करना। इनके इलाज के लिए ऐसा एक इलाज तंत्रिका संबंधी संगीत थेरेपी है। तंत्रिका संगीत थेरेपी एक तरह से फिजियोथेरेपी या स्पीच थेरेपी की तरह काम करती है, जिसका मकसद मरीजों को लक्षणों से निपटने और उनके दैनिक जीवन में बेहतर तरीके से काम करने में मदद करना है। उदाहरण के लिए किसी दुर्घटना या आघात के बाद फिर से चलना सीख रहे मरीज थेरेपी सत्र के दौरान संगीत की धुन पर चल सकते हैं।

अभी तक इस तरह की थेरेपी ने आघात के मरीजों को भाषा फिर से सीखने, चलना-फिरना सीखने और शारीरिक गतिविधि वापस हासिल करने में मदद की है। अनुसंधानकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि क्या तंत्रिका संबंधी संगीत थेरेपी से अन्य विकार जैसे कि पार्किंसन बीमारी का इलाज किया जा सकता है। इस क्षेत्र में ज्यादातर अध्ययनों ने ‘रिदमिक एंटरटेनमेंट’ व्यायाम नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया, जो धुन के साथ तालमेल बैठाने की मस्तिष्क की क्षमता का इस्तेमाल करती है जैसे कि संगीत या धुन की एक खास गति पर चलना। यह भी पता लगाया गया कि इस तरह की थेरेपी से सिर पर लगी चोट के कारण मस्तिष्क के ठीक तरीके से काम न करने यानी ब्रेन इंजरी या ‘हंटिंगटन’ बीमारी से पीड़ित लोगों में संज्ञानात्मक दिक्कतों का इलाज किया जा सकता है।

संगीत सुनने से न्यूरान की मरम्मत बेहतर तरीके से होती है। संगीत का मस्तिष्क पर दीर्घकालीन असर पड़ता है। इसका इतना ज्यादा असर होता है कि एक संगीतकार का मस्तिष्क उन लोगों के मुकाबले असल में ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है जिन्होंने संगीत नहीं बजाया है। यह तंत्रिका संबंधी स्थितियों से पीड़ित लोगों के लिए ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि संगीत से समय बीतने पर उनके दिमाग के क्षतिग्रस्त हुए हिस्से की मरम्मत करने में मदद मिल सकती है। यह पता लगाने के लिए अनुसंधान हो रहा है कि क्या उम्र संबंधी बीमारियों जैसे कि डिमेंशिया या अल्जाइमर से पीड़ित लोगों की मदद के लिए संगीत का इस्तेमाल किया जा सकता है।

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