India LPG Gas Shortage: पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है। ईंधन की कथित कमी की खबरों के बीच गुरुवार को देशभर में लोग पेट्रोल पंपों और एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। इसके चलते आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ रेस्टोरेंट, स्कूलों और कैंटीनों का कामकाज भी प्रभावित होने लगा है। हालांकि सरकार ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की कोई कमी नहीं है और यह अफवाहें फैलाने का समय नहीं है।

सरकार रेस्तरां और होटलों जैसे कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए केरोसिन, ईंधन तेल, बायोमास और यहां तक ​​कि कोयले जैसे अन्य ईंधन विकल्पों को बढ़ावा दे रही है। गलत सूचना और चिंता के कारण एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग में कई गुना वृद्धि हुई है, ऐसे में सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराहट का शिकार न हों और सिलेंडरों की जल्दबाजी में बुकिंग से बचें।

LPG की किल्लत को लेकर सरकार ने उठाया यह कदम

सरकार ने वाणिज्यिक उपयोग के लिए औसत मासिक एलपीजी आवश्यकता का 20% आवंटित करने का भी निर्णय लिया है। यह राज्य सरकारों के समन्वय से किया जाएगा। इसके अलावा, घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में सिलेंडर बुक करने के कारण ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में घरों द्वारा सिलेंडर बुक करने के बीच न्यूनतम अंतराल को बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है जबकि शहरों में यह 25 दिन ही रहेगा। पहले न्यूनतम अंतराल 21 दिन था लेकिन संघर्ष शुरू होने के बाद इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया था।

ईंधन के विकल्पों पर सरकार का फोकस

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा, “एलपीजी और गैस चैनलों पर दबाव कम करने के लिए ईंधन के विकल्पों पर ध्यान जा रहा है। खुदरा दुकानों और सार्वजनिक वितरण चैनलों के माध्यम से केरोसिन उपलब्ध कराया जा रहा है। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए ईंधन तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि इस संकट की अवधि के दौरान, आतिथ्य और रेस्तरां क्षेत्र के लिए एक महीने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में बायोमास, आरडीएफ पेलेट्स और केरोसिन/कोयले के उपयोग की अनुमति दी जाए।”

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने चिन्हित लाभार्थियों को वितरण हेतु राज्य सरकारों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन जारी किया है। उन्होंने कहा कि कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगारेनी कोलियरीज कंपनी को छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के उपयोग हेतु राज्यों को अधिक मात्रा में कोयला आवंटित करने का निर्देश दिया है।

भारत के एलपीजी आयात पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्वपूर्ण मार्ग से समुद्री यातायात के पूरी तरह ठप हो जाने से भारत के एलपीजी आयात पर असर पड़ा है। देश अपनी एलपीजी की लगभग 60% आवश्यकता आयात पर निर्भर करता है और एलपीजी आयात का 90% हिस्सा पश्चिम एशिया से इसी जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत की एलपीजी खपत का लगभग 55% हिस्सा फिलहाल अनुपलब्ध है।

संकट को देखते हुए, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं को एलपीजी की आपूर्ति को वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं से पहले प्राथमिकता दी है। सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है और उन्हें प्रोपेन, ब्यूटेन और अन्य पेट्रोकेमिकल पदार्थों को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ने का निर्देश दिया है। वाणिज्यिक क्षेत्र में, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को निर्बाध प्राथमिकता आपूर्ति दी गई है। सरकार ने कहा कि मांग की स्थिति चाहे जो भी हो उन्हें एलपीजी की पूरी आपूर्ति सुनिश्चित है।

भारत में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित- पेट्रोलियम मंत्री

हरदीप सिंह पुरी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है और पेट्रोल, डीजल, केरोसिन या विमानन टरबाइन ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि 33 करोड़ से अधिक परिवारों, विशेषकर गरीबों और वंचितों के घरों में गैस की कमी न हो। उन्होंने आगे कहा कि घरेलू आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित है और वितरण पर भी कोई असर नहीं है।

एलपीजी की कालाबाजारी ने बढ़ाई मुसीबत

ऊर्जा के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत की आपूर्ति व्यवस्था पर अचानक बहुत बड़ा असर पड़ा है। गुजरात में टाइल कारखाने ठप हो गए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें